ललितपुर। वर्ष 2019 में अतिवृष्टि से नष्ट फसल का बीमा क्लेम पाने से वंचित किसानों को बीमा मिलने की उम्मीद जाग गई है। बैंकों द्वारा किसानों का डाटा बीमा कंपनी के फॉर्मेट में भेजा जा रहा है। इसके लिए किसानों से आधार कार्ड भी लिए जा रहे हैं।
जिले में वर्ष 2019 में खरीफ की फसल कटाई से पहले ही लगातार दस दिन बारिश होने से फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। इससे कई किसान बर्बादी की कगार पर आ गए थे। किसान संगठनों की मांग पर नष्ट फसल का सर्वे कराया गया। नष्ट फसल की जांच केंद्र व राज्य सरकार की टीमों के द्वारा की गई थी। इसमें टीम ने 70 फीसदी नुकसान माना था। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत वर्ष 2019 में जनपद के दो लाख 40 हजार किसानों में बैंक में ऋणी एक लाख 51 हजार किसानों का बीमा बैंक द्वारा प्रीमियम राशि काटकर किया गया। इसके साथ ही लगभग 1700 किसानों ने सीधे प्रीमियम राशि देकर बीमा कराया था।
लेकिन, अब तक कई किसानों को बीमा क्लेम नहीं मिल सका है। इनमें 7551 किसानों की प्रीमियम राशि बैंक द्वारा काटी गई, लेकिन पोर्टल पर डाटा अपलोड न होने से बीमा क्लेम अटका हुआ है। इसका कारण बैंक के पास किसान का आधार कार्ड नहीं होना माना जा रहा है। इनमें कुछ किसानों का आधार कार्ड गलत पाया गया। या खाता संख्या से मिलान नहीं होने से कंपनी के पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सके हैं। इससे यह किसान बीमा क्लेम पाने से वंचित रह गए हैं। लेकिन अब बैंकों द्वारा बीमा कंपनी को किसानों के आधार कार्ड व अन्य डाटा ऑफ लाइन भेजा जा रहा है। इसके लिए बैंकों में किसानों के आधार कार्ड मंगवाए जा रहे हैं। त्रुटि होने पर डाटा सुधार कर भेजा जा रहा है। ऐसे में इन किसानों को बीमा क्लेम मिलने की उम्मीद जाग गई है।
आधार कार्ड में गलती होने के चलते किसानों का डाटा बीमा कंपनी के पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सका था। अब बीमा कंपनी को ऑफ लाइन डाटा भेजा रहा है। किसानों को शीघ्र ही बीमा क्लेम मिलेगा।
- एके सेठ, जिला अग्रणी बैंक प्रबंध
इस तरह होता फसल बीमा
आपदाओं से नष्ट होने वाली फसलों के नुकसान से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने फसल बीमा योजना संचालित की है। इसमें किसानों को अपनी फसल का बीमा कराना होता है। इसके बाद फसल में नुकसान होने पर बीमा कंपनी द्वारा नुकसान की भरपाई की जाती है। बीमा के लिए किसानों को अपनी जमीन के दस्तावेज, बैंक की छायाप्रति व आधार कार्ड के साथ बीमा कराना होता है। यदि किसान बैंकों में ऋणी है तो बैंक द्वारा बीमा की प्रीमियम राशि काट ली जाती है। गैर ऋणी किसानों को बीमा कंपनी के प्रतिनिधि को प्रीमियम राशि देकर बीमा कराना होता है।