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संभल जाओ, वरना बंजर हो जाएंगे खेत

Fri, 15 Jul 2016 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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agriculture meet, lalitpur news - फोटो : demo
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ललितपुर। अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से जनपद के अस्सी फीसदी खेतों में जीवाश्म कार्बन तत्व की कमी खतरे की श्रेणी में पहुंच गई है। अगर जल्द ही किसानों ने जीवाश्म कार्बन को बचाने के प्रयास नहीं किए, तो जनपद के खेत बंजर हो जाएंगे। 
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खेत की जमीन में मौजूद विभिन्न तत्व फसल की उत्पादकता, गुणवत्ता पर असर डालते हैं। इन तत्वों में सबसे महत्वपूर्ण जीवाश्म कार्बन होता है। जीवाश्म कार्बन खेतों में वैक्टीरिया का भोजन होता है। जीवाश्म कार्बन की कमी से वैक्टीरिया की उपस्थिति प्रभावित होती है। वैक्टीरिया ही अन्य पोषक तत्वों को खेतों में बनाने में सहायक होते हैं। किसान भले ही कितना यूरिया, डीएपी खाद खेत में डाल दें, लेकिन जीवाश्म कार्बन व बैक्टीरिया की कमी होने के कारण यह खाद खेतों में घुलती नहीं है।

मृदा परीक्षण प्रयोगशाला जनपद के खेतों के लगातार नमूने ले रही है। इन नमूनों की जांच में सामने आया है कि जनपद के 80 फीसदी खेतों में जीवाश्म कार्बन की मात्रा .25 से .65 फीसदी की श्रेणी में पहुंच गई है। जबकि यह मात्रा .80 फीसदी से अधिक होना चाहिए। 
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लौटना पड़ेगा पुरानी खेती पर 
खेतों में जीवाश्म कार्बन की मुख्य कमी का कारण अत्यधिक रासायनिक खादों का उपयोग होना है। जनपद में कृषि विभाग द्वारा एक हजार एकड़ जमीन में जैविक खेती का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसका कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती की तरफ मोड़ना है। फसल कटने के बाद खड़े ठूंठों में आग लगा दी जाती है, इस कारण से भी जीवाश्म कार्बन खत्म हो रहा है। कृषि वैज्ञानिक इन ठूंठों को जलाने के बजाए खेत में ही दबा देने की सलाह देते हैं। इनके सड़ने से भी खेतों में जीवाश्म कार्बन में बढ़ोत्तरी होती है। 

बन रही पूरे जिले की रिपोर्ट
केंद्र सरकार के मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जनपद के गांवों की जमीन की जांच की जा रही है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक 10 हेक्टेयर पर एक नमूना लिया जा रहा है। जांच के बाद कमी को दूर करने में किसानों की मदद की जाएगी। पिछले वर्ष 17 न्याय पंचायतों से 4500 नमूनेे लिए गए थे। शेष गांवों से नमूने हाल में लिए जा रहे हैं। इस योजना के पूर्ण होने के बाद जनपद के सभी गांवों की जमीन की पूरी रिपोर्ट कृषि विभाग के पास उपलब्ध रह सकेगी।
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किसानों को साल में एक बार अपने खेतों में जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करना चाहिए, जिससे जीवाश्म कार्बन की जरूरी मात्रा उपलब्ध हो जाती है। 
 सुरेंद्र कुमार सिंह, प्राविधक सहायक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला
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