ललितपुर। बेसिक शिक्षा विभाग भले ही मौजूदा वर्ष को गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मना रहा हो, लेकिन विभागीय अफसर शायद इससे इत्तेफाक नहीं रखते। हर तीन माह में गुुणवत्ता अनुश्रवण प्रपत्र भरने का नियम बना गया है। लेकिन, इसके बाद भी विभागीय अफसरों ने इसे प्राथमिकता में नहीं रखा है।
इस कारण इन प्रपत्रों को वर्तमान सत्र में एक भी बार नहीं भराया जा सका है। इससे परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता की हकीकत सामने नहीं आ पा रही है।
सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत लाखों रुपये की लागत से स्कूलों के आलीशान भवन बनवा दिए गए हैं। राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान वर्तमान वर्ष को गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मना रहा है। इसे ध्यान में रखकर हर तीन माह में स्कूलों के गुणवत्ता प्रपत्र भरने का नियम बनाया गया है।
यही नहीं, प्रत्येक विद्यालय की ग्रेडिंग करने के निर्देश हैं। लेकिन, विभागीय अफसर ही शासन की मंशा पर पानी फेरने में लगे हैं। वर्तमान शैक्षिक सत्र में न तो गुणवत्ता अनुश्रवण प्रपत्र और न ही विद्यालयों के श्रेणी करण की प्रक्रिया अपनाई गई हैै।
हालांकि, इस संबंध में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र भी जारी किए। लेकिन, खंड शिक्षा अधिकारियों ने इस ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। ऐसी स्थिति में स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता की सच्चाई सामने नहीं आ पा रही है। इसका अनु़िचत फायदा लापरवाह शिक्षकों को मिल रहा है। उन्होंने शिक्षण पर ध्यान देना ही बंद कर दिया है। विभागीय अफसर इस मामले में चुप्पी साधे हैं।
यह भरा जाता विवरण
गुणवत्ता अनुश्रवण प्रपत्र में स्कूल की प्रगति, परीक्षा का विवरण, सत्र परीक्षा का विवरण, स्कूल की भौतिक प्रगति और अध्यापक की उपस्थिति आदि विवरण भरा जाना है।
श्रेणीकरण यह है प्रारूप
स्कूलों के श्रेणीकरण प्रारूप में ए, बी, सी और डी श्रेणी लिखी जाती है। इसके अलावा श्रेणी विहीन, योग, विद्यालय विकास योजना निर्माण का भी उल्लेख किया जाना है। महत्वपूर्ण बात यह है कि श्रेणीकरण के लिए दो सदस्यीय टीम भी गठित होनी थी। लेकिन, इस पर भी ध्यान नहीं दिया गया।
डायरेक्टर जता चुके नाराजी
शिक्षा निदेशक बेसिक दिनेश बाबू शर्मा ने सितंबर माह में बीएसए को पत्र लिखकर शैक्षिक स्तर में सुधार के अपेक्षित प्रयास नहीं होने पर नाराजी जताई थी। इसके बाद भी विभागीय अफसर नहीं चेते।
गोद लिए स्कूल भी भूले अफसर
डायट प्राचार्य, बीएसए, खंड शिक्षा अधिकारी व सह समन्वयकों ने दो-दो विद्यालय गोद लिए थे। इन विद्यालयों को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जाना था। विभागीय अफसरों ने गोद लेने के बाद शायद ही विद्यालयों की सुध ली हो, जिससे आदर्श विद्यालय की संकल्पना पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।
इतने निरीक्षण हैं तय
बेसिक शिक्षा अफसरों के प्रति माह विद्यालयों के निरीक्षण तय किए गए हैं। इनमें एडी बेसिक झांसी को मंडल की हर तहसील के पांच विद्यालय, बीएसए, डायट प्राचार्य को 10-10 विद्यालय, जिला समन्वयक प्रशिक्षण को बीस विद्यालयों के निरीक्षण करने हैं। विभागीय अफसर तय लक्ष्य के आसपास भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।