ललितपुर/कारीटोरन। ब्लॉक बिरधा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बरखिरिया की माइनर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त पड़ी है। इसमें जगह-जगह मिट्टी कट गई है साथ ही गड्ढे भी हो गए हैं। खेतों ने नहर की शक्ल ले ली है। जिससे आसपास के किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है।
इन दिनों नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य किया जा रहा है लेकिन अभी भी ऐसी माइनरें हैं जो पानी का वेग झेलने की स्थिति में नहीं हैं। इन्हीं में से एक बरखिरिया माइनर है। इस नहर की जगह-जगह मिट्टी कट गई है, जिससे पानी ने अपना रास्ता खेतों की ओर बना लिया है। माइनर से लगे कई खेत ऐसे हैं, जिनमें मिट्टी का कटाव हो गया है। कुलाबा नंबर पांच भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। यदि ऐसे में नहर में पानी छोड़ दिया गया तो पानी आगे बढ़ने की जगह खेतों में घुस गया, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। स्थानीय किसानों ने सिंचाई विभाग के अफसरों से नहर की मरम्मत कराने की मांग की है। मांग करने वालों में राघवेंद्र नामक, हरगोविंद, राकेश झा, राजकुमार कुशवाहा, हरीराम कुशवाहा, राजेश नायक, मनमोहन, दमरु कुशवाहा, परमानंद सहरिया, काशीराम सहरिया आदि शामिल रहे।
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हर साल नहर की सफाई के नाम महज औपचारिकता कर ली जाती है। जब नहर में पानी छोड़ा जाता है तो मेरे खेतों में पानी भर जाता है, जिससे फसल बर्बाद हो जाती है। नहर पूरी तरह क्षतिग्रस्त है, जिसे जल्दी से ठीक करने की आवश्यकता है।-रघुवीर सहाय वाजपेई
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ब्लॉक बिरधा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बरखिरिया माइनर की जगह-जगह मिट्टी कटी हुई है, साथ ही गड्ढे हो गए हैं। अभी तक न तो नहर पर मिट्टी डाली गई और न सफाई की गई है। नहर कटने से किसानों के खेतों की मिट्टी बहकर खेतों में गड्ढे बना देती है।-शालिकराम नायक
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नहर में पानी छोड़ने की तैयारी चल रही है। वहीं, अभी तक नहर की सफाई नहीं की गई और न ही मिट्टी डाली गई। यदि इस साल नहर की ठीक से मरम्मत नहीं हुई तो खेतों में फसल उगाना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि खेतों के बीच से निकलता है। महेश प्रसाद नायक
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यदि नहर के किनारे ठीक नहीं रहते हैं तो उसका पानी खेतों में चला जाता है। इस बार गोविंद सागर बांध में पिछले साल के मुकाबले पानी कम है। नहर क्षतिग्रस्त रही तो पानी दुबारा बर्बाद हो जाएगा तो ऐसे में कैसे फसल उग पाएगी, यह चिंता सता रही है।-हरगोबिंद विश्वकर्मा[
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कुछ ही दिन में नहर खुलने वाली है। यदि ऐसे में ही नहर में पानी छोड़ दिया गया तो नहर से पानी रिसकर खेतों में पहुंचता रहेगा और इससे फसल बोने में दिक्कत उत्पन्न हो जाएगी। कई जगहों पर नहर के पानी ने खेतो में अपना रास्ता बना लिया है, फसल बर्बाद हो जाती है।
अजुद्दी अहिरवार
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जहां-जहां आवश्यकता है और नहरें कटी हैं तो वहां मरम्मत कराई जाएगी। नहर की सिल्ट सफाई का कार्य मनरेगा से कराया जा रहा है। यदि कहीं कुलाबा बंद हैं तो उनकी भी सफाई कराई जाएगी। शहजाद व गोविंद सागर बांध की नहरों का रोस्टर तैयार कर लिया गया है। सात नवंबर से नहरों का परिचालन आरंभ हो जाएगा।
मनमोहन सिंह, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड
मिट्टी कटने से कई जगहों पर खेतों ने ले ली नहर की शक्ल- फोटो : LALITPUR