कूटरचित दस्तावेजों के सहारे फर्जी लोन कराए स्वीकृत, कार व दो मोबाइल बरामद
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बजाज फाइनेंस कंपनी और आम लोगों से 1.71 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में वांछित सेल्स मैनेजर दिनेश कुमार उर्फ कार्तिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के कब्जे से एक स्कॉर्पियो कार, दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन और एक कलाई घड़ी बरामद की गई है। बुधवार को पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया।
बजाज फाइनेंस कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर संदीप सोलंकी की तहरीर पर वर्ष 2025 में कोतवाली पुलिस ने महेंद्र बरार समेत सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। आरोप था कि कूटरचित दस्तावेज तैयार कर आरोपियों ने कंपनी को 1.71 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाई। मामले की जांच के लिए एसपी मोहम्मद मुश्ताक ने जनपद स्तरीय एसआईटी गठित की थी।
पुलिस अब तक इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। जांच के दौरान बजाज फाइनेंस की ललितपुर शाखा के सेल्स मैनेजर दिनेश कुमार उर्फ कार्तिक निवासी गुरु गोविंद सिंह नगर, थाना लुधियाना (पंजाब) व द्वितीय पता सुशील नगर, चुर्खी रोड, उरई (जालौन) को बुधवार को बैंक कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उनका एक संगठित गिरोह था, जिसमें बजाज फाइनेंस के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। गिरोह के सदस्य लोन दिलाने के नाम पर आम लोगों को गुमराह कर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी ऋण स्वीकृत कराते थे। आरोपी ने बताया कि इसी धन से उसने स्कॉर्पियो कार खरीदी और अन्य खर्च किए।
सीओ सदर सुनील भारद्वाज ने बताया कि करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में वांछित चल रहे सेल्स मैनेजर को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामले की गहनता से जांच जारी है।
स्टांप पेपरों में की गई कूटरचना
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने वर्ष 2024 और 2025 में स्टांप पेपर खरीदकर उनमें कूटरचना की और उनके विक्रय पत्र वर्ष 2016 से पूर्व के दर्शाए। इन फर्जी दस्तावेजों को बैंक ऋण आवेदन पत्रों के साथ संलग्न कर लोन स्वीकृत कराया गया। इसके बाद ऋण की रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कर ली गई।
सेल्स मैनेजर होने का उठाया फायदा
पूछताछ में दिनेश कुमार ने बताया कि वह बजाज फाइनेंस लिमिटेड की ललितपुर शाखा में सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत था। उसका काम ग्राहकों को लोन की जानकारी देना और उनकी जांच-पड़ताल के बाद ऋण स्वीकृत कराने की प्रक्रिया पूरी कराना था। इसी दौरान उसने राशिद उर्फ सानू, राशिदा, रमाकांत रिछारिया, करन साहू और महेंद्र बरार से संपर्क कर ऋण आवेदकों को तलाशने को कहा। शुरुआत में कुछ वास्तविक आवेदन दिए गए, जिसके एवज में उसने उन्हें कमीशन भी दिया। बाद में अधिक धन कमाने के लालच में फर्जी ऋण स्वीकृत कराने की योजना बनाई और गिरोह के साथ मिलकर काम को अंजाम दिया।
भोले-भाले लोगों को बनाते थे निशाना
आरोपी ने बताया कि उसके साथी करन साहू, राशिद खान, रमाकांत रिछारिया और महेंद्र बरार ऐसे अनपढ़ और जरूरतमंद लोगों की तलाश करते थे, जिन्हें पैसों की आवश्यकता होती थी। उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि लेकर उन्हें लोन दिलाने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद उनके नाम पर फर्जी सेल डीड और अन्य कागजात तैयार कर ऋण स्वीकृत कराया जाता था।