अदालत से आरोपी को राहत नहीं, अब तक छह आरोपियों की जमानत निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बजाज फाइनेंस में 1.71 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में सीनियर सेल्स मैनेजर लखनऊ निवासी आरोपी अभिनव निगम की जमानत याचिका अपर सत्र विशेष न्यायाधीश की अदालत ने खारिज कर दी है। इस प्रकरण में अब तक कुल छह आरोपियों की जमानत याचिकाएं निरस्त की जा चुकी हैं, जबकि एक महिला और एक युवक को पूर्व में जमानत मिल चुकी है।
बजाज फाइनेंस कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर संदीप सोलंकी की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने करीब पांच माह पूर्व सात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया था। आरोप है कि आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर कंपनी को 1,71,01,703 रुपये का नुकसान पहुंचाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने जनपदस्तरीय एसआईटी का गठन किया था।
जांच के दौरान पुलिस ने नवनीत, महेंद्र, करन, राशिद खान उर्फ सानू व उसकी मां राशिदा, गोविंद नगर निवासी शमीम खान और रामनगर निवासी शिवम राठौर को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के कब्जे से कंप्यूटर, प्रिंटर, मोहर सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए थे। इस मामले में शिवम राठौर की गिरफ्तारी के बाद उसके पिता लक्ष्मीनारायण राठौर ने बेटे को जेल भेजे जाने से आहत होकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद परिजनों ने शिवम को झूठे आरोपों में फंसाने का आरोप लगाते हुए इलाइट चौराहे पर शव रखकर प्रदर्शन भी किया था। बाद में पुलिस ने शिवम पर लगी पुरानी धाराएं हटाकर नई धाराएं जोड़ीं, जिसके बाद उसे सीजेएम न्यायालय से जमानत मिल गई थी। महिला आरोपी राशिदा को सूर्योदय से पूर्व गिरफ्तार किए जाने के मामले में सीजेएम न्यायालय ने कोतवाल को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा था। बाद में न्यायालय से राशिदा को भी जमानत मिल गई। पुलिस ने आठ नवंबर को सातों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद महेंद्र बरार, करन, शमीम खान और नवनीत सिंह की जमानत याचिकाएं दायर हुईं, जिन्हें न्यायालय ने खारिज कर दिया। विवेचना के दौरान मोहल्ला पिसनारी निवासी वीरेंद्र कुमार का नाम सामने आने पर उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जिसकी जमानत याचिका भी न्यायालय ने निरस्त कर दी।
विवेचना में झांसी और ललितपुर में सीनियर सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत लखनऊ के थाना पारा अंतर्गत गायत्री बिहार निवासी अभिनव निगम का नाम प्रकाश में आया। आरोप है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सह अभियुक्तों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा और बिना मूल दस्तावेजों की जांच कराए रिपोर्ट के आधार पर लोन स्वीकृत कराए। अदालत ने गंभीर आरोपों को देखते हुए आरोपी अभिनव निगम की जमानत याचिका खारिज कर दी।