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शिक्षक कर रहे बाबू का कार्य

Wed, 26 Aug 2015 12:37 AM IST
ललितपुर ब्यूरो
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ललितपुर। एक तरफ स्कूलों में खराब शिक्षण व्यवस्था होने के पीछे शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य लेने को जिम्मेदार ठहराया जाता है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों को समाजवादी पेंशन से जुड़े लाभार्थियों के बच्चों की फीडिंग में लगा दिया गया है। ऐसे में अनेक स्कूलों में शिक्षण कार्य बाधित हो गया है।
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जिले में सैंतीस हजार उन्तालीस लाभार्थियों को समाजवादी पेंशन का लाभ प्रदान किया जा रहा है। शासन ने चिह्नित परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर नजर रखने के लिए सर्वे कराया था, जिसमें अधिकांश परिवारों के बच्चे स्कूलों में नामांकित हैं जबकि कुछ बच्चे स्कूल की देहरी से दूर हैं। इसकी हकीकत तक पहुंचने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन एवं ऑफ लाइन फीडिंग कराई जा रही है। पहले यह कार्य एक एजेंसी को सौंपा गया था, लेकिन ऐन वक्त पर निर्णय बदलते हुए शिक्षा विभाग पर इसकी जिम्मेदारी डाल दी गई। वर्तमान में तमाम शिक्षक, शिक्षा मित्र एवं अनुदेशक चिह्नित बच्चों की फीडिंग करा रहे हैं। मंगलवार को 32,013 परिवारों के फार्मों की फीडिंग हो चुकी, जबकि पांच हजार छब्बीस फार्म फीडिंग के लिए शेष हैं। इस फीडिंग में इक्कीस हजार तीन सौ बावन बच्चे निकलकर आए हैं, जो प्राथमिक शिक्षा से जुड़े हैं। विडंबना यह है कि एक ओर प्राथमिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वहीं, इसकी अनदेखी करते हुए शिक्षकों को फीडिंग के कार्य में लगा दिया गया है। शिक्षक भी बिना किसी ऐतराज के लगे हुए हैं, जिससे अनेक स्कूलों में शिक्षण कार्य बुरी तरह बाधित हो गया है।


सह समन्वयकों को भी लगाया
शिक्षण कार्य में आने वाली अड़चनों को दूर करने का जिम्मा सह समन्वयकों के कंधों पर है। इसके बाद भी उन्हें फीडिंग के कार्य में लगा दिया गया है। इसके अलावा खंड शिक्षा अधिकारी एनएल शर्मा को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
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जनरेटर पर हो रहा काम
ब्लाक संसाधन केंद्रों पर प्रशिक्षण के दौरान शायद ही जनरेटर चला हो, लेकिन फीडिंग के कार्य में जनरेटर का इस्तेमाल हो रहा है।


शिक्षक संघों ने साधी चुप्पी
स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था की पोल खुलते ही शिक्षक संघ गैर शैक्षणिक कार्य नहीं लेने का राग अलापने लगते हैं। वर्तमान में शिक्षकों से अनेक गैर शैक्षणिक कार्य लिए जा रहे हैं, इसके बाद भी शिक्षक संघ चुप हैं, जो चर्चा का विषय बन गए हैं।
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