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छह साल बाद भी अधूरा मकान का सपना, 809 पात्र कच्चे घर में रहने को मजबूर

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ललितपुर। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में चयन के बाद भी पांच वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी 809 पात्रों को आज तक धेला भी नहीं मिला है। जिले के चार शहरी क्षेत्रों से 20343 लोगों को आवास के लिए चयनित किया गया था। जिसमें से 19534 लाभार्थियों को पहली किस्त मिल चुकी है।
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प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 तक गरीब जनता को पक्का मकान देने का वादा किया था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र सात महीने का समय बचा हुआ है। लेकिन अभी तक जिले के चार शहरी क्षेत्र जिला मुख्यालय, तहसील महरौनी, पाली, तालबेहट मुख्यालय के मात्र 20343 पात्र लोगों के आवास देने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। खास बात है कि इन 20343 पात्र लोगों में से 809 पात्र चयनित लोगों को एक रुपया भी नहीं मिला है। जबकि 19534 लाभार्थी पहली किस्त, 17163 दूसरी व 8765 तीसरी किस्त मिल चुकी है। इनमें भी आधे से अधिक आवास पूर्ण नहीं हैं।
सरकार के दावे यहीं फेल दिखाई दे रहे हैं कि जिले में छह साल में केवल बीस हजार आवास भी नहीं बन पाए है। बतातें चलें कि प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना वर्ष 2015-16 में प्रारंभ की गई थी। इसे लागू वित्तीय वर्ष 2016-17 में किया गया था। सरकार का दावा था कि शहरी क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति कच्चे मकान में नहीं रहेगा। सरकार ने आवास बनाने के लिए ढाई लाख रुपये देने शुरू किए। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले के चार अरबन एरिया के कुल चयनित किए गए बीस हजार लाभार्थियों में से 809 लाभार्थियों को पांच वर्ष बाद भी प्रथम किस्त जारी न होना, कहीं न कहीं प्रशासन के दावों की पोल खोल रहा है।
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दो माह से आवंटित नहीं हुई धनराशि
प्रधानमंत्री शहरी आवास के लाभार्थी को सरकार के द्वारा ढाई लाख रुपये तीन किस्तों में दिए जाते है। जिसमें पहली किस्त में 50 हजार, दूसरी किस्त में डेढ लाख रुपये व तीसरी किस्त में 50 हजार रुपये जारी किए जाते हैं। लेकिन एक जून से प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत कोई भी धनराशि जनपद को आवंटित नहीं हुई है।
2371 लाभार्थियों के पास नहीं है छत
प्रधानमंत्री आवास के लिए चयनित पात्र लोगों ने पहली किस्त के पचास हजार रुपये मिलने पर अपनी झोपड़ी तोड़कर पक्के मकान की नींव रख ली। ऐसे 2371 परिवार हैं जिन्हें सिर्फ पहली किस्त प्राप्त हुई। लेकिन इन्हें छत डालने के लिए शासन से अब तक दूसरी किस्त की धनराशि नहीं मिली है। जिस कारण यह लोग या तो उसी मकान में पन्नी डालकर रहने को मजबूर हैं या फिर किराए के मकान में रह रहे हैं।
शासन से बजट जारी होते हुए प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के शेष छूटे हुए लाभार्थियों को धनराशि उनके खातों में भेज दी जाएगी। - राकेश त्रिपाठी, सिटी मिशन मैनेजर, नगरीय विकास अभिकरण
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