मन, वचन और कर्म की पवित्रता से पूजा करने पर साधक के भीतर का परमात्मा प्रकट होता है : मुनिश्री
संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि सौम्यसागर एवं मुनि जयंत सागर महाराज का शनिवार को नगर में मंगल आगमन हुआ।
टीकमगढ़ चातुर्मास की पूर्णता के बाद मुनिश्री का विहार महरौनी की ओर हुआ। शनिवार सुबह आनंदपुर आश्रम के महात्मा अघटयुक्ति आनंद सहित महात्माओं ने विनम्र भाव से उनका पाद प्रक्षालन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह 8 बजे मुनिश्री का आगमन नगर में हुआ तो श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए।
जैन समाज ने पेट्रोल पंप चौराहे पर मुनिश्री की भव्य अगुवानी की गई। मुनिश्री अजितनाथ जैन मंदिर पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। मुनि सौम्यसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में पूजा केवल बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा की ओर अग्रसर करने का माध्यम है। मुनिश्री ने सभी को आत्मसंयम, अहिंसा और आत्मजागरण का संदेश दिया। धर्मसभा के उपरांत मुनिश्री सैदपुर के लिए विहार पर निकले। पांच नवंबर को वे सागर पहुंचेंगे, जहां उनके गुरु आचार्य विशुद्धसागर महाराज से उनका मंगल मिलन होना है।