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ललितपुर के होनहारों ने वायुमंडलीय विक्षोभ का किया आंकलन

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ललितपुर। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल ने स्ट्रेटोस्फियर- ट्रोपोस्फीयर (एसटी) राडार को संवेदनशील हिमालय क्षेत्र के वायुमंडल में संचालित किया तथा इसके द्वारा वायुमंडलमें होने वाले विक्षोभ का पहली बार आकलन किया गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे मौसम तथा जलवायु संबंधी जानकारी और उसके पूर्वानुमान को और बेहतर किया जा सकेगा। एस टी राडार 32 किमी ऊंचाई तक मौसम संबंधी जानकारी दे सकेगा। ललितपुर के दो होनहार एरीज के वैज्ञानिकों डॉ.मनीषकुमार नजा तथा शोधछात्र आदित्य जायसवाल के पर्यवेक्षण में विक्षोभ आंकलन का कार्य किया गया।
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वायुमंडलीय विक्षोभ विमान दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। अब एस टी राडार की इस क्षेत्र में उपयोगिता सिद्ध होने के बाद वायुमंडल में प्रबल विक्षोभ के संवेदनशील क्षेत्रों का पता लगाया जा सकेगा और उसका पूर्वानुमान भी किया जा सकेगा, जिससे इस तरह की घटनाओं को कम करने में सहायता मिलेगी। ललितपुर के होनहार वैज्ञानिक डा. मनीष कुमार नजा और शोध छात्र आदित्य जायसवाल के पर्यवेक्षण में पूर्ण किए गए इस कार्य को अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के जर्नल रेडियो साइंस में प्रकाशित किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि भारत निर्मित इस राडार से हिमालय क्षेत्र में वायुमंडलीय विक्षोभ का आंकलन किया गया। इस शोध के लिए राडार द्वारा वायुमंडल में रेडियो तरंगें प्रवाहित की गईं और वायुमंडल के तापमान और आर्दता में आने वाले परिवर्तनों से प्रतिध्वनित तरंगो से रेडियो अपवर्तन सूचकांक (रेफ्रक्टिवइंडेक्स) में आए परिवर्तन के मान को ज्ञात किया गया। इसी परिवर्तित मान से वायुमंडलीय विक्षोभ की गणना की गयी।
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