अतिक्रमण से नगर के नझाई बाजार की अधिकांश सड़कें संकरी हो गई हैं। घंटाघर से जूता चप्पल लाइन में घुसते ही अतिक्रमण का अहसास होने लगता है। थोड़ा सा आगे चलते ही सड़क सिकुड़ी नजर आती हैं, जहां से पैदल निकलना दूभर है। यहां एक ओर अघोषित दुपहिया वाहन पार्किंग स्थल है तो दूसरी ओर दुकानों के आगे बाहर रखा सामान लोगों के लिए मुसीबत खड़ी करता है।
वैसे तो समूचे नगर में अतिक्रमण पसरा है लेकिन नझाई बाजार की हालत ज्यादा खराब है। यहां जूता चप्पल लाइन से अतिक्रमण की शुरुआत हो जाती है तो समूचे बाजार में दिखाई देता है। बुखारिया की दुकान के पास अतिक्रमण देखते ही बनता है। यहां एक ओर दुपहिया वाहन बड़ी संख्या में रखे जाते हैं। वहीं, दुकानदार भी अतिक्रमण करने से पीछे नहीं हैं। यहां कुछ दुकानदारों ने सड़क की परवाह किए बगैर ही अपनी दुकान बाहर निकाल ली है। इससे रास्ता सिकुड़कर दो फुट के आसपास ही रह गया है। यहां पैदल चलना दूभर हो गया है। यदि आमने सामने से बाइकें आ रही हों तो एक वाहन को कुछ देर के लिए रुकना पड़ेगा। यह स्थिति लगभग रोजाना बनती है। बाजार में लगा हैंडपंप भी अतिक्रमण से अछूता नहीं रहा। हैंडपंप के इर्दगिर्द भी लोगों ने दुकान सजा ली हैं।
यहां बने एक कूप को भी अतिक्रमणकारियों ने छिपा दिया है। दूर देखने पर कूप नजर नहीं आता है। इसके तीन ओर निर्माण हो गए हैं। डा. भीमराव अंबेडकर कामर्शियल कांप्लेक्स में जगह-जगह अतिक्रमण पसरा है। इस परिसर में स्वामी विवेकानंद पार्क बना हुआ है, जिसके बगल में अतिक्रमण कर दुकानें सजा ली गई हैं। बीते माहों में तत्कालीन एसडीएम सदर घनश्याम वर्मा व सीओ सदर हिमांश गौरव ने नझाई बाजार का अतिक्रमण हटाया था। बाजार एक दिन भी अतिक्रमणमुक्त नहीं रह पाया। अगले ही दिन दुकानदारों ने रोजाना की तरह बाहर दुकानें सजा ली थी, तब से लेकर अब तक बाजार में अतिक्रमण हटाने के लिए दूसरा कोई अधिकारी पहुंचा नहीं है। जिससे कई दुकानदार बाजार में पसरे अतिक्रमण से दुखी हो गए हैं।
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