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एशिया सुंदरी दिव्यांशी का नवागढ़ गुरुकुलम में किया गया सम्मान

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नवागढ़ गुरुकुलम में बच्चों व माता पिता के साथ एशिया सुंदरी दिव्यांशी - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। महरौनी ब्लॉक क्षेत्र में स्थित प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में एशियन सुंदरी दिव्यांशी (मूक-बधिर) ने आकर गुरुकुल के छात्रों का उत्साहवर्धन किया। वह शुक्रवार को अपने माता पिता के साथ आई थीं। उन्होंने इस तरह का संस्थान बनाने की इच्छा जताते हुए क्षेत्र के निर्देश जय निशांत भैया से आशीर्वाद मांगा।
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दिव्यांशी ने कहा कि ऐसे क्षेत्र का दर्शन विलक्षण है। यहां की धरोहर, प्राकृतिक सुंदरता, भगवान अरनाथ स्वामी का अतिशय अद्भुत है। यहां का गुरुकुल एवं उसकी व्यवस्था अनुकरणीय है। नवागढ़ विरासत कृति का अवलोकन करते हुए उन्होंने क्षेत्र को विश्व का अलौकिक एवं विलक्षण बताते हुए संकेत किया कि मैंने कई देशों का भ्रमण किया परंतु जो पुरातात्विक संपदा एवं प्राकृतिक सौंदर्य यहां है, वह कहीं देखने को नहीं मिली। यहां भौयरा, मानस्तंभ, शैलचित्र , रॉक आर्ट, पाषाण औजार पुरासंपदा का खजाना है। इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित होना चाहिए।
दिव्यांशी ने छात्रों को प्रेरणा देते हुए उत्साहवर्धन किया। बच्चों को भोजन परोसा और उन्हीं के साथ खाना खाया। नवागढ़ गुरुकुलम के संस्थापक व निर्देशक ब्र.जय निशांत भैया के से कहा कि वह भी दिव्यांगों के लिए एक संस्था विकसित करना चाहती हैं। जिससे बुंदेलखंड के दिव्यांगों को शिक्षा एवं सामाजिक परिवेश में सम्मान मिल सके। इस मौके पर ब्र. राजेश भैया वर्द्धमान, ब्र.विनोद भैया, गुरुकुलम के अधीक्षक संजीव जैन, शिक्षक अरिहंत जैन, महावीर जैन, राहुल जैन, मुन्नालाल जैन, पंडित अजित जैन ने दिव्यांशी को अंगवस्त्र, श्रीफल, माला, तिलक आदि से सम्मानित किया।
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मूकबधिर बेटा और बेटी के माता-पिता भी खुश
दिव्यांशी के पिता देवेंद्र जैन बुखारिया एवं मां दिव्या ने बताया कि मुझे भगवान ने विशेष अवसर प्रदान किया है। मेरे बच्चे दिव्य एवं दिव्यांशी दोनों मूकबधिर हैं, परंतु खुशी है भगवान ने हमें उनकी परवरिश का विशेष अवसर प्रदान किया। इंदौर हॉस्टल में पढ़ाई करते हुए दिव्यांशी की क्षमता एवं योग्यता को देखते हुए वहां की अध्यक्ष ने हमसे दिव्यांशी को मप्र सुंदरी प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति चाही परंतु हम मानसिक रूप से तैयार नहीं हो सके। दिव्यांशी की लगन, निष्ठा, समर्पण एवं संस्कृति के प्रति बहुमान और उसके भविष्य को देखते हुए हमने अनुमति प्रदान की।
दिव्यांशी ने प्रतिभा एवं योग्यता से आज भारत सुंदरी ही नहीं एशिया सुंदरी का गौरव प्राप्त करते हुए विश्वसुंदरी में तृतीय स्थान प्राप्त करके परिवार, समाज एवं देश का गौरव बढ़ाया है।- डॉ. सुनील संचय, क्षेत्र के प्रचार मंत्री
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