ललितपुर। परिवहन विभाग की मेहरबानी से शहर की सड़कों का हाल बेहाल बना हुआ है। रोजाना ओवर लोड वाहन धड़ल्ले से फर्राटा भर रहे हैं, जिससे सड़कों की स्थिति दयनीय होती जा रही है। लेकिन, जिम्मेदार परिवहन विभाग मौन बना हुआ है।
परिवहन विभाग द्वारा सड़कों पर फर्राटा भरने वाले भारी वाहनों से माल ढोने के मानक तय किए गए हैं, इस क्रम में वाहनों के प्रकार के आधार पर उनमें माल भरकर ढोने की निर्धारित क्षमता से अधिक माल नहीं ले जाया जा सकता है। इसके लिए निर्धारित प्रपत्रों के साथ जुर्माना व वाहन सीज तक करने तक का प्रावधान है।
लेकिन, भारी वाहन स्वामियों द्वारा परिवहन विभाग के नियमों व मानकों को ताक पर रखकर शहर की सड़कों पर निर्धारित क्षमता से अधिक माल लादे हुए ओवरलोड वाहनों को चलाया जा रहा है। यदि विभाग सख्ती करता है तो अन्य उपाय अमल में लाए जाते हैं।
इसमें विभाग से जुड़े कुछ बाहरी तत्व महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं और ओवरलोड वाहनों को निकालने का मंत्र वाहन स्वामियों को विशेष नजराना लेकर दिया जाता है। इस फार्मूले पर अमल करते हुए शहर की सड़कों पर रोजाना ओवरलोड वाहन फर्राटा भर रहे हैं और सड़कों का हाल बेहाल कर रहे हैं।
परिवहन विभाग द्वारा ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है और वाहनों पकड़कर जुर्माना व अन्य कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन कुछ विशेष वाहन इस अभियान के दायरे से बाहर रहते हैं और परिवहन विभाग की मेहरबानी से खुलेआम क्षमता से अधिक माल भरकर ढो रहे हैं। हालांकि परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो विभाग द्वारा मामला सामने पर ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।
ओवरलोड वाहन पकड़ने पर लगती सिफारिशें
परिवहन विभाग द्वारा सख्ती बरतने पर जब वाहनों को पकड़कर कार्रवाई की जाती है, तो विभाग में सिफारिशों की झड़ी लगना शुरू हो जाती है। जिसमें सिफारिशी खुद को विधायक, यहां तक कि परिवहन मंत्री को अपना करीबी बताने से नहीं झिझकते हैं और वाहन छुड़वाने को हर तरीके को आजमाते हैं।
दलालों की रहती महती भूमिका
शहर में संचालित हो रहे ओवरलोड वाहनों को छुड़वाने में परिवहन विभाग के कार्यालय के बाहर अन्य कार्यों का संचालन दर्शाकर कब्जा जमाए बैठे दलालों की महती भूमिका होती है। वाहनों के प्रकार के आधार पर उनके रेट निर्धारित होते हैं। उतने रेट मिलने पर ओवरलोड वाहनों को छुड़वाने का जिम्मा लेकर लिपिकों की मदद से पूरा कर दिया जाता है।
दलालों की एंट्री कार्यालय में बंद है, लेकिन विभाग में दलालों के ही कामों को ही तवज्जो दी जाती है। बाकी सबके लिए नियम से ही काम करवाना होता है, जो विभाग का मुख्य फंडा है।