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हवा हवाई साबित हो रहा राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अभियान

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dengu - फोटो : dengu
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ललितपुर। जिले में डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अभियान हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। यहां पर एडीज मच्छर के लार्वा तो पाए जा रहे, लेकिन जांच के अभाव में डेंगू के मरीज सामने नहीं आ रहे हैं। इससे संक्रामक बीमारियों के पनपने का खतरा बना हुआ है।
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बारिश के मौसम में डेंगू जैसी घातक संक्रामक बीमारियों की रोकथान में लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें स्वास्थ्य विभाग की टीमें सरकारी कार्यालय और घरों में पहुंच कर सर्वे कर निरीक्षण कर रहीं है। सरकारी कार्यालय में रखे कूलर और टंकियों की जांच में एडीज मच्छर के लार्वा तो पाए जा रहे हैं। जिसे टीम द्वारा मौके पर ही कूलरों और टंकियों में लार्वा रोधी दवा का छिड़काव कर नष्ट कर रही है। वहीं, टीम द्वारा डोर-टू डोर सर्वे भी किया जा रहा है।
जिले में अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम को सरकारी कार्यालय व घरों की जांच में 430 एडीज मच्छर के लार्वा पाए गए हैं। लेकिन जिम्मेदार डेंगू की रोकथाम को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है। यहां पर लार्वा मिलने के बाद भी डेंगू के लिए मरीजों की जांच शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अभियान हवा हवाई साबित हो रहा है।
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जनपद में नहीं है एलाइजा टेस्ट की सुविधा
जिले में अब तक डेेेंगू के मरीजों की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। मरीजों को किट से जांच के बाद पुष्टि के लिए अब भी मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए सैंपल भेजा जाता है। जहां पर जांच रिपोर्ट आने में भी समय लग जाता है। तब तक अन्य लोगों में भी फैलने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा प्लेट कम होने पर मरीजों को उपचार के लिए झांसी रेफर करना पड़ता है।
इन रोगों की रोकथाम को चलाया जा रहा अभियान
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अभियान छह बीमारियों की रोकथाम के लिए चलाया जा रहा है। इसमें प्रमुख रुप से डेंगू, चिकिनगुनियां और फायलेरिया, जापानीज इंसेफलाइसेज व कालाजार बीमारी आदि हैं।
डेंगू व अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए लार्वा की खोज कर नष्ट किया जा रहा है। इसमें लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लेकिन ओपीडी सेवा व अन्य जांच सेवा सरकारी अस्पतालों में बंद होने से मरीज चिह्नित नहीं हो पा रहे हैं।
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- मनोज कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी
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