मड़ावरा। ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों की संख्या में घूम रहे अन्ना पशुओं ने किसानों की रातों की नींद और दिन का सुकून छीन लिया है। जानवरों से अपनी फसलों की सुरक्षा कर पाना बड़ा मुश्किल काम हो गया है। फसलों की रक्षा के लिए किसान दिन रात परेशान है। रात- रात भर जागकर फसलों की रक्षा करनी पड़ती है। सैकड़ों की संख्या में घूम रहे अन्ना पशु मौका पाकर रात के समय खेतों में घुस जाते हैं और फसलों को चट कर जाते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिलाधिकारी से समस्या के समाधान की मांग की है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अन्ना पशुओं की समस्या गंभीर रुप धारण करती जा रही है, अब तो किसान इन जानवरों के आगे अपने आपको बेबस सा महसूस करने लगा है। गांव- गांव में मौजूद ये अन्ना पशु दिन में मुख्य मार्ग पर बैठे रहते हैं तथा रात में खेतों की ओर अपना रुख कर लेते है।
अन्नदाताओं के लिए पिछले कुछ सालों से खेती करना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है प्राकृतिक आपदाओं के चलते कभी सूखा तो कभी तुषार कभी अतिबृष्टि तो कभी ओलाबृष्टि के कारण किसानों को काफी आर्थिक छती उठानी पडी है किसान अभी प्राकृतिक आपदाओं की मार से उबर ही नहीं पाया था की अब क्षेत्र में अन्ना पशुओं के रुप में किसानों के सामने एक और गंभीर समस्या खड़ी हो गयी है
जिसके सामने किसान बेबस नजर आने लगा है पहले बारिश नहीं होने के कारण फसलों के सूख जाने की चिंता किसानों को सता रही थी बारिश के बाद अन्ना जानवरों से खेतों में लहलहाती फसलों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है ये जानवर गांव में बडी संख्या में मौजूद है दिन में सडकों पर बैठे रहते है और देर रात्रि में खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पँहुचा रहे है फसलों की सुरक्षा के लिये तो कुछ किसान रात रात भर जाग रहे है। वहीं कुछ गांव के किसान इन जानवरों को अपने गांव की सीमा से दूसरे गांव की सीमा में खदेड़ देते हैं, जिससे किसानों के बीच इन जानवरों को लेकर आये दिन बिबाद हो रहे है खासतौर पर इस तरह की समस्या सैदपुर, सतवांसा, साढूमल,मडावरा ,धवा ,बम्हौरी, पिपरट, जलंधर भोंती, पहाड़ी, दिदौनियाँ मुख्य मार्ग पर बसे गांवों में देखने को मिल रही है अन्ना जानवरों की समस्या से जूझ रहे किसानों ने जिलाधिकारी से समस्या के समाधान की मांग की है ।
जंगली इलाकों के नजदीक बसे गांवों में ज्यादा मुश्किल
जंगली क्षेत्रों के आसपास बसे गांव के किसानों के लिए खेती करना और ज्यादा मुश्किल हो रहा है। इन गांवों के किसान पहले से ही जंगली जानवरों के कारण परेशान हैं ऊपर से उपर से अन्ना जानवरों ने और समस्या बढ़ा दी है। किसानों का कहना है की नीलगाय एवं जंगली सुअर फसलों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। जंगली सुअर तो फसलों की जडे़ तक खोदकर खा जाते हैं।
जंगलों में भेजे जाएं अन्ना पशु
क्षेत्र में हजारों की संख्या में घूम रहे अन्ना पशुओं को अगर जंगल में भिजवा दिया जाए तो किसानों की समस्या का समाधान हो सकता है। मडावरा वन क्षेत्र हजारों हेक्टेयर में फैला हुआ है, बारिश हो जाने के कारण जंगल में पर्याप्त घास उग आयी है और जगह जगह पीने के लिये पानी भी उपलब्ध हो गया है, इसके लिए प्रशानिक अधिकारी वन अधिकारियों से वार्ता करके समस्या का समाधान निकाल सकते हैं।
हो रही हैं दुर्घटनाएं
अन्ना पशुओं के मुख्य मार्ग पर.बैठे रहने या आसापास विचरण करते रहने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। खासतौर पर दुपहिया वाहन चालकों के लिए अन्ना जानवर मुसीबत बन रहे हैं पूरे मार्ग पर बैठे रहते हैं। दुपहिया वाहन चालक इनसे बचकर निकलने के प्रयास में या तो फिसल कर गिर जाते हैं या जानवरों से टकरा कर चुटहिल हो जाते हैं। इन जानवरों की वजह से कई जगह जन हानि भी हो चुकी है।