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किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा आंवला

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women farmers - फोटो : amarujala
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बुंदेलखंड की कंकरीली, पथरीली, असिंचित जमीन में आंवला की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसकी खेती कर किसान अपनी आय को बढ़ाकर चौगुनी कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात है कि कम देखरेख में आंवला के पेड़ तैयार हो जाते हैं। पेड़ों में फल आने के बाद तो किसानों की तकदीर ही बदल जाती है।
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बुंदेलखंड का मौसम एवं जलवायु आंवला के लिए काफी अनुकूल है। कंकरीली पथरीली जमीन में वह सभी तत्व मौजूद हैं जो आंवला के पेड़ के लिए जरूरी हैं। तमाम किसान परंपरागत खेती को छोड़कर अब उद्यान की खेती के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। इसकी मुख्य वजह बुंदेलखंड में सिंचाई के पर्याप्त साधनों की कमी होना है। परंपरागत खेती में सिंचाई के लिए ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा फसल चक्र नहीं अपनाने से भी किसानों को नुकसान हो रहा है। इसे ध्यान में रखकर जिले के कुछ किसानों ने अपनी जमीन में आंवले की खेती को अपनाया है। कुछ किसान इसकी शुरुआत करीब 10 12 साल पहले कर चुके हैं। ऐसे किसान आंवले की खेती में बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। इससे कई और किसानों ने आंवला की खेती में दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है। उद्यान विभाग के  अधिकारियों के अनुसार, इस समय जनपद में लगभग 43 किसान आंवले की खेती में उतरे हैं। ऐसे किसान आंवले को स्थानीय मंडी के अलावा झांसी सागर की मंडियों में बेच रहे हैं।  

कम देख रेख में तैयार हो जाते आंवले के पेड़
14 वर्ष पहले पांच एकड़ जमीन में करीब पांच सौ पौधे उद्यान विभाग से अनुदान पर लेकर रोपित किए थे। इन पेड़ों से करीब 500- 800 क्विंटल आंवले के फल तैयार हो रहे हैं, जिन्हें स्थानीय मण्डी के अलावा दूसरे जिलों में भी बेच रहे हैं। कुछ आंवले के फल पकने से पहले झड़ जाते हैं, ऐसे आंवला को इकट्ठा कर उन्हें सुखा लेते हैं। इसके बाद जड़ी बूटी वालों को 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब बेच देते हैं। पके दागी आंवले को तुड़वाने के बाद उसे उबालकर उसकी गुठली को अलग कर लेते हैं। कली को सुखाने के बाद जड़ी बूटी विक्रेताओ को 160 रुपये प्रति किलो के हिसाब बेच देते हैं। इस तरह इस खेती में मुनाफा ही मुनाफा हो रहा है।
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प्रताप सिंह, अर्जुन खिरिया


आंवला में हैं कई प्रजातियां
आंवले में वैज्ञानिकों द्वारा कई प्रजातियां तैयार की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से कृष्णा, कंचन, नरेंद्रा सेविन एवं नरेंद्रा टैन आदि प्रजातियां हैं। दस साल पहले एक एकड़ जमीन में करीब 110 पेड़ लगवाएं थे जो तीन साल में फल देने लगे। आंवले के साथ खेत में रबी खरीब की फसलें भी पैदा कर लेते हैं। आंवले से 60 -80 हजार रुपये मिल जाते है, इसमें लागत भी काफी कम है। कलमी पेड़ लगाने पर तीन वर्ष में फल देने लगता है जबकि बीज से तैयार पेड़ को फल देने में दस वर्ष लग जाते हैं।  दिनेश पस्तोर

किसानों को खेती पर मिलता अनुदान
पिछले साल तक किसानों को आंवला के बाग के लिए तीन हजार रुपये महीने प्रति हेक्टेयर के हिसाब से अनुदान दिया गया है। इस वर्ष अनुदान पर कोई इस तरह योजना नहीं है। आंवले की खेती के साथ किसान इंटर क्रापिंग खेती भी कर सकते हैं। इसमें एक हेक्टेयर में करीब 275 पेड़ लगाए जा सकते हैं। पेड़ वयस्क होने पर फल देने लगते हैं। आंवला लगाने पर किसान को एक हेक्टेयर में एक लाख साठ हजार रुपये की अतिरिक्त आए हो सकती है।
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सुघर सिंह, जिला उद्यान अधिकारी ललितपुर
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