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अलविदा की नमाज घर ही होगी अदा

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ललितपुर। इस बार लॉकडाउन के बीच रमजान का आखिरी जुमा यानी अलविदा जुमा आज है। इस बार लॉकडाउन के कारण अलविदा जुमा की नमाज की जगह घरों में जौहर की नमाज होगी।
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अलविदा जुमा रमजान के आखिरी अशरे में पड़ता है। ये सभी दिनों से अफजल, यानि सबसे बेहतर होता है। जाहिर बात है कि जब ऐसा मौका मुसलमानों के बीच से रुखसत हो रहा हो तो उनका गमगीन होना लाजिमी है। इसलिए, अलविदा के मौके पर मुसलमान नमाज में अल्लाह से अगला रमजान पाने की इच्छा जताते हैं।
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जौहर की नमाज की तरह अलविदा की नमाज
फिलहाल लॉकडाउन के कारण मस्जिदों में सामूहिक इबादत की मनाही है। राज्य सरकार की तरफ से अब तक मस्जिदों में नमाज अदा करने की इजाजत नहीं मिली है। लिहाजा उसका असर अलविदा जुमा पर भी पड़ने वाला है। लोग घरों पर ही रहकर अलविदा मनाएंगे। चूंकि, जुमा और ईद-उल-फितर की नमाज सामान्य नमाजों से अलग होती है. इसके लिए खुतबा जरूरी होता है। ईद-उल-फितर में खुतबा नमाज अदा करने के बाद पढ़ा जाता है, जबकि जुमा में नमाज से पहले, लॉकडाउन में अलविदा जुमा की नमाज घर पर जौहर की नमाज की तरह पढ़नी होगी। अलविदा के बाद लोग ईद की तैयारियों में जुट जाते हैं। अपने परिजनों के लिए कपड़े खरीदने की कवायद में लग जाते हैं, जिसको पहनकर ईद की नमाज अदा की जा सके।
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फोटो-55
जगह जौहर की नमाज अपने-अपने घर ही अदा करें।
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अलविदा की नमाज शासन के नियम के मुताबिक घरों पर ही अदा करें, जिस तरह से लोग अभी तक शासन की मंशा के अनुरुप ही अपने घरों में रहकर रमजान के महीने में घर पर ही रहकर इबादत करते आ रहे हैं, उसी तरह से अवाम से गुजारिश है कि घर पर ही नमाज अदा करें।
- असलम कुरैशी, सदर मुस्लिम एसोसिएशन।
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हुकूमत की मंशा के मुताबिक ही घर पर नमाज अदा करें। मस्जिदों में प्रशासन द्वारा जितने लोगों को नमाज अदा करने के लिए अनुमति मिली है, उसी के मुताबिक नमाज अदा करें। इस कोरोना महामारी से बचने के लिए बाजारों में भीड़-भाड़ न इकट्ठी करें, नए कपड़े न पहने, जरुरत मंदों व गरीबों की मदद करें।
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- हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, सदर उर्स कमेटी।
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