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झांसी, ललितपुर में टिड्डियों को लेकर फिर अलर्ट

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allert for locust attack
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झांसी- ललितपुर। टिड्डियों का आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। रविवार को ललितपुर के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों के ऊपर भारी संख्या में टिड्डियां उड़ती दिखीं। इतनी बड़ी संख्या में टिड्डियां देख किसान चिंतित हो गए। उनके द्वारा ढोल, बर्तन आदि बजाने से टिड्डी दल यहां नहीं उतरा और आगे बढ़ गया हालांकि कृषि अफसरों ने झांसी, ललितपुर में टिड्डियों के आगे आने की आशंका जताई है।
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लगभग दो सप्ताह से टिड्डी दल जिले के समीपवर्ती मध्य प्रदेश की सीमा में डेरा जमाए हुए है। शिवपुरी, गुना, अशोक नगर के साथ ही झांसी एवं ललितपुर के इर्द-गिर्द घूम रहा है। इसे हवा के साथ चलने में आसानी होती है। शनिवार को यह दल शिवपुरी में था लेकिन, तेज हवा चलने से यह वहां से नहीं उड़ा। रविवार को मप्र सीमा से सटे राजघाट क्षेत्र से ललितपुर के ब्लॉक जखौरा के ग्राम बसवां की ओर से टिड्डी दल ने प्रवेश किया। यहां से ग्राम इकलगुवां, किसलवास, गुरसौरा, करमुहारा, देवरी, लागौन, मैलार, गैंदौरा, मड़वारी, कालापहाड़ आदि गांवों के ऊपर टिड्डी दल मड़राता दिखा लेकिन, नीचे नहीं उतरा।
इसी तरह शिवपुरी से आए टिड्डी दल ने तीसरी बार तहसील तालबेहट के गांवों में दस्तक दी। यह दल गुंदेला, कोटरा, बांबादीवर आदि इलाकों के ऊपर उड़ता दिखा। टिड्डी दल के आने की सूचना पर पहले से सतर्क ग्रामीणों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इस पर टिड्डी दल बांसी की ओर चला गया। यहां पर यदि टिड्डियां नीचे उतरती तब खरबूजे की फसल को नुकसान पहुंचा सकती थीं। यहां समय पर किसान सर्तक थे। टिड्डियों की आशंका से किसान बुरी तरह सहमे हुए हैं। टिड्डी दल हरियाली व हरी फसल को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है। इनके प्रकोप से आने वाली फसलों की उत्पादन क्षमता भी नष्ट होती है। सब्जी एवं जायद की फसल उगाने वाले किसान भी इनसे काफी चितिंत हैं। जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक कुमार का कहना है हवा का बहाव बदलने पर झांसी में भी इनका किसी भी दिन प्रकोप हो सकता है। इसको देखते हुए सारी व्यवस्थाएं एलर्ट पर रखी गई हैं।
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जागरूकता के चलते नहीं हुआ नुकसान
टिड्डी दल की सूचना को देखते हुए सभी जगहों पर अलर्ट रखा गया है। जैसे ही सीमा से टिड्डी दल का प्रवेश हुआ। आसपास के गावों को सतर्क कर दिया गया। वहां पर किसानों ने थाली व ढोल बजवा कर टिड्डी दल को भगाया, लेकिन बेतवा नदी के किनारे अधिक हरियाली होने से अधिक समय तक यहां मंडराता रहा। टिड्डी दल नीचे न उतर सके, इसलिए एक दर्जन से अधिक गांवों में शोरगुल किया गया। इन गांवों में किसानों के बीच जागरूकता की वजह से यहां नुकसान नहीं हो सका।
गांव- गांव बजने लगी थाली और झालर
टिड्डी दल के आने की सूचना मिलते ही ग्राम कोटरा, राजपुर, गुलेंदा आदि गांवों में चौकन्ने किसानों ने शोर करने के लिए घर में रखी थाली, ढोलक और पूजा के घंटे व झालर बजाए। बांध के भराव में क्षेत्र में रखी नावों को भी कुछ लोगों ने बजाया, जिससे टिड्डी दल नीचे नहीं उतरा।
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