ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए कई किस्तों में मात्र 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। शुक्रवार को ग्राम मिर्चवारों में विद्युत कर्मियों की लापरवाही के चलते एक विद्युत खंभा टूट गया, इसके कारण 22 गांव की बिजली 10 घंटे तक गुल रही, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गांव में ट्यूबवेल से सिंचाई के लिए कितनी बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
शुक्रवार को बाईपास विद्युत सब स्टेशन में स्थापित कॉलनि-निवाई, कलयानपुरा, नदनवारा, मसौरा व रघुनाथपुरा फीडर की बिजली गुल हो गई है। इन फीडरों की स्थिति यह है कि यदि इनके अंतर्गत किसी ग्रामीण क्षेत्र में फाल्ट हो जाता है तो विभागीय कर्मियों द्वारा उस गांव से पूर्व का जंफर काट दिया जाता है और इससे उस गांव के आगे के गांव की बिजली गुल हो जाती है, जबकि उस फीडर की मशीन में रीडिंग बराबर आने से सुुचारु आपूर्ति दर्शाई जाती है। इसके बाद जब फाल्ट सुधारा जाता है, तो उसी समय शटडाउन लेकर उस फीडर की बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। ऐसे में उस फीडर के कई ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली उतने समय के लिए ठप बनी रहती है। ऐसे में बाईपास फीडर के ग्रामीण क्षेत्रों को मुश्किल से 14 से 15 घंटे ही बिजली आपूर्ति हो रही है। वहीं, यदि महरौनी, बिरधा व पाली विद्युत सब स्टेशन में स्थापित फीडरों के अंतर्गत गांवों की बात करें तो स्थिति और भी गंभीर है। महरौनी विद्युत सब स्टेशन में स्थापित महरौनी, सैदपुर, बानपुर, क्योलारी और सिलावन फीडरों पर अत्यधिक ओवरलोड होना बताया जा रहा है, जिसके चलते यहां के सभी फीडरों को विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर 12-12 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर निर्धारित किया गया है। इस दौरान यदि उक्त किसी भी फीडर पर फाल्ट आ जाता है, तो ऐसी स्थिति में एक से घंटे या फिर कई बार इससे भी अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित बनी रहती है, जिससे नलकूप कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं को मुश्किल से 10 घंटे ही बिजली आपूर्ति मिल पा रही है। वहीं बिरधा बिजली उपघर में स्थापित फीडरों की स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं है। बिरधा बिजली घर में नाराहट व खितवांस फीडर के अंतर्गत गांवों को भी 8 से 10 घंटे ही बिजली उपलब्ध कराई जा पा रही है। पाली बिजली घर के अंतर्गत बालाबेहट व धौर्रा फीडर की स्थिति भी काफी खराब है। बताया गया है कि बालाबेहट व उसके आस पास ग्रामीण क्षेत्रों में रात में 10 से 11 बजे ही आकर सुबह पांच बजे तक ही गांवों को रोशन करती है, इसके बाद दिन में भी मुश्किल से दो से तीन घंटे या फिर कई बार इससे भी कम समय के लिए बिजली आपूर्ति की जा रही है। इससे ग्रामीणों को नलकूप के माध्यम से सिंचाई के लिए भारी परेशान होना पड़ रहा है। किस्तों में दस से बारह घंटे बिजली आपूर्ति मिलने के कारण किसानों को सिंचाई में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में उनको बुवाई के समय ही फसल सूखने की चिंता भी सताने लगी है।
नाराहट फीडर की बनाई तीन लाइनें, फिर भी छह घंटे कटौती
ललितपुर। यदि विभागीय दावे को सच माना जाए तो सिंचाई का समय होने के चलते ट्यूबवेल कनेक्शनों को पर्याप्त बिजली मुहैया कराने के लिए हर दिन मात्र छह घंटे ही कटौती की जा रही है। इसके लिए विभाग द्वारा नाराहट फीडर को तीन लाइनें बनाकर विद्युत आपूर्ति की जा रही है। लेकिन वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार हर दिन गांवों में करीब आठ से दस घंटे बिजली कटौती तो हो रही है, जिससे किसानों का सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है।
जेनरेटर से चला रहे मोटरें
ललितपुर। पर्याप्त बिजली नहीं मिलने या फिर लो-वोल्टेज के कारण बिरधा व महरौनी क्षेत्र के कई गांवों में ट्यूबवैल कनेक्शन होने के बाद भी किसानों को जेनरेटर रखकर डीजल से मोटरें चलानी पड़ रही है। ऐसे में किसानों को बिजली अव्यवस्था के चलते सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
150 एंपियर तक बढ़ा फीडरों पर लोड
ललितपुर। सिंचाई का समय होने के चलते विद्युत नलकूूप कनेक्शन चलने के कारण बिजली घरों में स्थापित विभिन्न फीडरों पर लोड 100 से 150 एंपियर तक बढ़ गया है। बाईपास सब स्टेशन में स्थापित कॉलनि निवाई फीडर पर 50-60 से 200 एंपियर, कल्यानपुरा फीडर पर 80 से 190-200 एंपियर, नदनवारा फीडर को लोड 70-80 से 120-130 एंपियर तक लोड बढ़ गया है। वहीं महरौनी बिजली घर में स्थापित बानपुर फीडर को लोड 100 एंपियर से 180-200 तक, सिलावन फीडर का लोड 90 से 200 एंपियर, सैदपुर फीडर को लोड 8-90 से 210 एंपियर और क्योलारी फीडर को लोड 50-55 एंपियर से बढ़कर 85 एंपियर तक बढ़ गया है।
60 अस्थाई कनेक्शन हुए जारी
ललितपुर। उपखंड कार्यालय द्वितीय के अंतर्गत बाईपास, बिरधा व पाली विद्युत सब स्टेशन के ग्रामीण क्षेत्रों में गत वर्ष की तुलना में इस बार 120 दिनों वाली स्कीम के तहत 80 अस्थाई विद्युत कनेक्शन सिंचाई यानि ट्यूबवेल के लिए जारी हुए। जबकि इससे कई गुना अधिक संख्या में अवैध ट्यूबवेल मोटरें भी संचालित हो रही हैं, जिससे स्थायी व अस्थाई कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं को योजनाओं का सही लाभ नहीं मिल पा रहा है।