केंद्र सरकार ने जमीन व मकानों की रजिस्ट्री कराने के लिए स्टांप की खरीदी के लिए चलन से बाहर हो चुके नोटों को उपयोग करने की अनुमति दी है, लेकिन लोग स्टांप की खरीदी कराने व रजिस्ट्री कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसका मतलब है कि लोगों में कहीं न कहीं यह भय है कि आयकर विभाग व केंद्र सरकार उनसे रजिस्ट्री में व्यय किए गए रुपयों का हिसाब तलब न कर लें।
एक हजार व पांच सौ रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर देने के बाद केंद्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ मतों में इन प्रतिबंधित नोटों की खपत करने की सुविधा जनता को दी है। केंद्र सरकार ने 24 नवंबर तक मकान-जमीन की रजिस्ट्री कराने व स्टांप की खरीदी करने के लिए प्रतिबंधित नोटों को भी मान्य किए जाने की घोषणा की है, इसके बावजूद आलम यह है कि स्थानीय लोग जमीन व मकानों की रजिस्ट्री कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
नोटबंदी की घोषण के दिन से अब तक जनपद में हुई स्टांप बिक्री पर नजर डाले तों नोटबंदी की घोषण के दिन आठ नवंबर को 14.31 लाख रुपये के स्टांपों की खरीदी की गई, लेकिन इसके बाद स्टांप की खरीदी में काफी गिरावट आ गई। 10 नवंबर को मात्र 1.15 लाख रुपये, 15 तारीख को 1.85 लाख रुपये, 16 तारीख को केवल 45 हजार रुपये व 17 तारीख को 80 हजार रुपये के स्टांपों की बिक्री हुई। वहीं, 18 तारीख को 2.75 लाख और 19 को 1.50 लाख रुपये के स्टांप की बिक्री हुई है। इससे यह साफ पता चलता है कि लोगों में यह भय है कि कहीं आयकर विभाग व केंद्र सरकार उनके इन रुपयों का हिसाब न पूंछ लें। जबकि पेट्रोल पंपों पर, अस्पताल व मेडिकलों पर, बिजली का बिल, ग्रहकर, जलकर आदि सरकारी बकाया तो चुकता करने में होड़ लगी हुई है।
रविवार को भी नगर पालिका में होगा गृहकर जमा
आज रविवार को भी नगर पालिका परिषद कार्यालय में गृहकर व दुकानों का किराया और बकाया प्रीमियम राशि जमा की जाएगें। यह जानकारी कर अधीक्षक हेमंत सिंह ने दी है, वहीं उन्होंने बताया कि शुक्रवार को करीब 09 लाख रुपये राजस्व की वसूली हुई है।