ललितपुर। जनपद में कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से नदीपुरा मोहल्ला के एक युवक की मौत के बाद जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के कार्यों से विरत रहने का निर्णय लिया है। अधिवक्ताओं ने कोरोना मौत के बाद न्यायालय खोले जाने के निर्णय को लोगों के लिए आत्मघाती बताया।
जिला बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव में बताया कि ललितपुर महामारी कोविड-19 के प्रकोप से वंचित नहीं रह पाया है। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश से आठ मई से जनपद न्यायालय में दी गई गाइडलाइन के अनुरूप न्यायिक कार्य करना शुरू कर दिया गया था, लेकिन एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाने से अधिवक्ताओं में भय है और न्यायालय खुलने की स्थिति में लोगों का कचहरी में आना स्वाभाविक है।
वीडियो कांफ्रेंसिंग प्रणाली से न्यायिक कार्य व व्यवस्थाओं के अभाव में न्यायिक कार्य सुचारु हो पाना भी संभव नहीं है। अधिवक्ताओं एवं वादकारियों में सोशल डिस्टेंस संभव नहीं है और वरिष्ठ अधिवक्ता जो 65 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उनका न्यायालय परिसर में आने से उच्च न्यायालय की दी गई गाइड लाइन का उल्लंघन होता है। ऐसी स्थिति में न्यायालय खोलने का निर्णय अधिवक्ताओं, न्यायिक कर्मचारियों व न्यायाधीशों के लिए आत्मघाती कदम होगा।
इस कारण सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है लॉकडाउन 17 मई तक जिला न्यायालय के समस्त अधिवक्ता पूर्ण रूप से न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे। यह भी निर्णय लिया गया कि उच्च न्यायालय को जनपद न्यायाधीश के माध्यम से न्यायालय बंद किए जाने के संबंध में अनुरोध पत्र प्रेषित करेंगे। प्रस्ताव पर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीप्रकाश चौबे, महामंत्री हरीराम राजपूत के हस्ताक्षर हैं।
महामारी से सुरक्षा को उचित निर्णय की मांग
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीप्रकाश चौबे ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति को संबोधित ज्ञापन जिला न्यायाधीश को दिया, जिसमें बताया गया कि उच्च न्यायालय द्वारा बीते आठ मई से जिला न्यायालय खोलने का जो निर्णय लिया गया है वह वर्तमान परिपेक्ष्य में कोरोना महामारी के संक्रमणों को दृष्टिगत रखते हुए उचित प्रतीत नहीं होता है। ललितपुर छोटा जिला है और यहां कोरोना बीमारी से एक व्यक्ति की मृत्यु भी हो चुकी है। शहर का एक चौथाई हिस्सा कन्टेन्मेंट जोन में परिवर्तित है। ऐसी स्थिति में काफी संख्या में अधिवक्ता भयग्रस्त हैं और न्यायालय में कार्य करने में अपने आपको असमर्थ महसूस कर रहे हैं। न्यायालय खोलने के निर्णय से अधिवक्ता, न्यायिक कर्मचारी व न्यायाधीशों के जीवन को संकट उत्पन्न हो गया है। मुख्य न्यायमूर्ति से मांग की गई कि अधिवक्ताओं, न्यायालय के कर्मचारियों व न्यायाधीशों की महामारी से सुरक्ष को दृष्टिगत रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए।
न्यायालय संचालन का स्वरूप तैयार
उच्च न्यायालय के दिशा निर्देश के परिपेक्ष्य में जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद वर्तमान में ओरेंज जोन श्रेणी के अंतर्गत है। ऐसे में जनपद न्यायालय ललितपुर में 11 मई से जनपद न्यायाधीश न्यायालय, विशेष क्षेत्राधिकार के मामलों से संबंधित न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संचालित होंगे। जनपद न्यायालय के लिए हेल्प लाइन नंबर 05176-275694 घोषित किया गया है, जिसका प्रयोग उपरोक्त न्यायालय के संचालन की जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। उच्च न्यायालय के निर्देश पर नवीन भवन स्थित सिविल जज जूनियर डिवीजन न्यायालय में वर्चुअल कोर्ट रुम की स्थापना की गई है, जहां उन्हीं अधिवक्ताओं को प्रवेश की अनुमति होगी, जो विशेष रुप से वर्चुअल कोर्ट रुम में जिनके वाद प्रश्नगत तिथि को न्यायालयों में नियत हैं। वादकारियों व अन्य प्रतिनिधिओं का न्यायालय परिसर में प्रवेश पूर्णत:प्रतिबंध रहेगा। यह जानकारी जनपद न्यायालय के प्रभारी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शत्रुघ्न प्रसाद उपाध्याय ने दी है।