ललितपुर। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपर जिला मजिस्ट्रेट की अदालत ने दो सगे भाइयों के खिलाफ गुंडा एक्ट के नोटिस को निरस्त करते हुए पूरी कार्रवाई समाप्त कर दी है। दो मुकदमों में नाम होने के आधार पर अपर जिला मजिस्ट्रेट ने गुंडा एक्ट की कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया था। दोनों भाइयों ने इसे कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने एडीएम की अदालत द्वारा जारी गुंडा एक्ट के नोटिस को रद्द कर दिया था और एडीएम को ऐसे मामलों में सावधानी बरतने के आदेश दिए थे।
अपर जिला मजिस्ट्रेट अंकुर श्रीवास्तव की अदालत ने कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला लक्ष्मीपुरा प्राइमरी पाठशाला के पास के रहने वाले दो सगे भाइयों सौरभ और शैलेंद्र कुमार को दो मुकदमों के आधार पर गुंडा घोषित करते हुए नोटिस जारी किया था। इसके साथ ही स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए थे। दोनों भाइयों ने हाईकोर्ट में अपर जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए बताया था कि उन दोनों पर आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में दो मुकदमे दर्ज हैं। इसके आधार पर एडीएम की अदालत ने उन दोनों को गुंडा घोषित कर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर जिलाधिकारी की ओर से जारी गुंडा एक्ट के नोटिस को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि केवल दो आपराधिक मामलों में नाम दर्ज होने के आधार पर किसी को गुंडा घोषित नहीं किया जा सकता।
सौरभ कुमार के खिलाफ 30 जून को एडीएम ने दो मुकदमों व एक बीट रिपोर्ट के आधार पर यूपी गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट में याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि केवल दो आपराधिक मामलों और एक बीट रिपोर्ट के आधार पर इस प्रकार का नोटिस जारी करना कानून का उल्लंघन है। अब इस मामले में सौरभ कुमार व शैलेंद्र कुमार की ओर से अधिवक्ता पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति अपर जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रस्तुत किया। इसके आधार पर एडीएम की अदालत ने खुद के न्यायालय द्वारा जारी नोटिस को निरस्त करते हुए उक्त गुंडा एक्ट की पूरी कार्रवाई समाप्त करने का निर्णय दिया है।