ललितपुर। दशम प्रतिमाधारी विरतमति माता जी के मृत्यु महोत्सव पर आचार्य आर्जव सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर क्षेत्रपाल में शांति विधान का आयोजन हुआ। इस मौके पर बुंदेली भक्ताम्मर कृति का विमोचन और प्रतिभावान छात्रों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर आचार्य आर्जव सागर महाराज ने संस्कारों की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कारों द्वारा ही व्यक्ति का जीवन सार्थक बनता है।
उन्होंने कहा कि जीवन मरण विधि की निरंतरता में जहां जन्म एक महोत्सव है, वहीं मृत्यु होने पर जीवन सार्थक हो जाता है। विरतमति माता जी ने संलेखना धारण कर ऐसा ही किया। बुंदेली भक्ताम्मर के रचयिता वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री डॉ कैलाश मड़वैया ने आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। बुंदेली भक्ताम्भर का विमोचन संतोष जैन गंजबासौदा, अजय टडैया भोपाल, संतोष सिंघई महरौनी, सुभाष जैन ग्वालियर, दिनेश जैन टीकमगढ़, विमल जैन बाजना, इंद्रजीत जैन पारौन ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर व्रहमचारिणी किरण, सुनीता, सीमा मीना, रितिका, शशि, रेखा, मंजू सविता, रिचा समैया ने किया। मंगलाचरण बाहुबलि नगर की बहनों ने गुरु वंदना कर किया। प्रतिभावान आईआईटी में चयनित ऋषि बड़कुल और सीए में चयनित रिमी जैन को जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डॉ अक्षय टडैया, शीलचंद अनौरा, कोमल दादा, प्रबंधक पंकज मोदी, पार्षद आनंद जैन, अजित जैन एड, अक्षय अलया ने सम्मानित किया। शान्ति विधान व्रहमचारी मनोज के आचार्यत्व में संपन्न हुआ। इसमें पुण्याजक परिवार प्रमोद कुमार पुष्पेन्द्र ककडारी परिवार रहे। अर्घ्य समर्पण करने का सौभाग्य महेन्द्र मड़वैया, अन्नू, आनंद, अमित, मधुर समैया, गुलाबचंद जैन, वीरेंद्र जैन को मिला।