ललितपुर। विभिन्न बैंकों के 725 ग्राहक करीब सात करोड़ रुपये निकालना भूल गए, इसमें सरकारी विभाग सहित निजी खाते भी शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि सरकारी विभाग के विशेष बजट के खाते खोले गए थे। काम होने के बाद बची धनराशि की विभाग ने सुध नहीं ली। वहीं, कई मामलों में खाताधारकों की मौत के बाद नॉमिनी का जिक्र न होने से पैसे निकाले नहीं जा सके। अब बैंकों ने लोगों को जागरूक कर रकम लौटाने की पहल शुरू की है।
ये रकम अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के पास चली गई है। यदि कोई दावेदार सामने आता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने पर धन वापस दे दिया जाएगा। दरअसल, ज्यादातर खाते ऐसे हैं, जिन्हें खुलवाने वालों की मृत्यु हो चुकी है। कुछ ऐसे भी खाते हैं जो परिजनों को जानकारी दिए बगैर खुलवाए गए थे। उनके दिवंगत होने पर ये खाते लावारिस हो गए। कुछ खाते ऐसे भी हैं जिनके परिजनों को बैंकिंग नियमों की जानकारी न होने से धन की निकासी नहीं हो सकी। इन खातों से लेनदेन न होने से उन्हें निष्क्रिय घोषित कर दिया गया। 10 वर्ष या इससे अधिक समय से बिना दावे की इस रकम को बैंकों ने आरबीआई को भेज दिया है। बैंकों को आरबीआई ने तीन माह तक विशेष अभियान चलाकर धनराशि वापस करने के निर्देश दिए हैं।
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पांच करोड़ सिर्फ सरकारी विभागों का : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक व सेंट्रल बैंक में स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण, पंचायती राज विभाग आदि के खाते हैं। बैंकों में पड़ा चार से पांच करोड़ रुपया इन्हीं विभागाें का बताया जा रहा है।
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यह है निष्क्रिय खातों की स्थिति
बैंक - खातों की संख्या - जमा धनराशि
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया- 202 - 2.25 करोड़
पंजाब नेशनल बैंक - 40 - 1.21 करोड़
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया- 56 - 1.00 करोड़
ईको बैंक - 79 - 0.75 करोड़
यूनियन बैंक - 45 - 0.65 करोड़
बैंक ऑफ इंडिया- 25 - 0.20 करोड़
यूपी ग्रामीण बैंक - 278 - 0.93 करोड़
भारतीय रिजर्व बैंक ने इन सभी खाताधारकों को जागरूक करते हुए धन लौटाने के लिए कहा है। तीन माह तक जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। खाताधारकों से संपर्क कर उनसे आवेदन लेकर धनराशि लौटाई जाएगी।-रंजीत सिंह, प्रबंधक जिला अग्रणी बैंक।