ललितपुर। जनता कर्फ्यू के दौरान शहर में रववार को अभूतपूर्व बंद रहा। सुबह से देर शाम तक सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। इक्का-दुक्का लोग ही सड़कों पर नजर आए। कुछ दुपहिया वाहन भी सड़कों पर दौड़ते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को आई, जो अन्य शहरों से लौटकर वापस आए। ऐसे लोगों को शहर में गंतव्य तक जाने के लिए टैक्सी व बस भी नसीब नहीं हुई।
सुबह सात बजे से जनता कर्फ्यू के आह्वान को देखते हुए कई लोगों ने अपने काम तय समयावधि के पहले ही निपटा लिए थे। जैन धर्मावलंबियों ने मंदिरों में दर्शन किए तो कइयों ने सुबह की अजान पढ़ी। कोराना वायरस के मद्देनजर तुवन मंदिर के कपाट पहले ही रविवार एवं मंगलवार के लिए बंद किए जा चुके हैं। सुबह के सात बजे ही लोग अपने घरों में वापस लौटने लगे थे। इसके बाद दिन भर शहर की सड़कें सूनी रही। जहां शहर का ह्दय स्थल माने जाने वाले घंटाघर पर आम दिनों में चहल-पहल हुआ करती थी, वहां सुबह से सन्नाटा पसरा रहा।
यही हाल सावरकरचौक, आजाद चौक, स्टेशन, जेल चौराहा, बस स्टैंड, पुराना बस स्टैंड का रहा। बाजारों में चाय, किराना, रेस्टोरेंट, होटल व जनरल स्टोर बंद रहे। जिन लोगों को बाजार में चाय पीने, गुटखा खाने की आदत है, वे इन सुविधाओं के अभाव में तलब के शिकार रहे। जिला अस्पताल के सामने केवल दो मेडीकल स्टोर संचालित दिखाई दिए। जबकि, कई अन्य मेडीकल स्टोर बंद रहे। सबसे ज्यादा वाहनों की कमी उन यात्रियों को खली जो विभिन्न शहरों से लौटकर ट्रेन से अपने शहर आए। उन्हें न तो शहर के विभिन्न मोहल्लों जाने के लिए टैक्सी, रिक्शा मिले और न ही गतंव्य जाने के लिए बसें उपलब्ध हुई। इस कारण तमाम लोगों को स्टेशन के पास बंद दुकानों की छांव में डेरा डालना पड़ा। कुछ यात्री ऐसे रहे जो साधन के लिए पैदल शहर में निकल गए। इस तरह कई लोग परेशान होते रहे।
सभी दिखे एकमत
सभी जनता कर्फ्यू के मामले में एकमत रहे। चाहे कोई भी दल का नेता हो, इस मामले में किसी ने खिलाफ में कोई टिप्पणी नहीं की। यही वजह रही कि मुख्य मार्गो से लेकर गली मोहल्लों में सन्नाटा पसरा रहा। कुछेक जगह ही एक दो लोग आपस में बातें करते दिखे। वरना, घरों के दरवाजे सूने पड़े रहे।
भोपाल से सकुशल ललितपुर स्टेशन पर उतर आए, लेकिन जैसे ही स्टेशन के बाहर निकले तो टैक्सी नदारद थी। जब कुछ समझ नहीं आया तो पैदल ही शहर में निकल आए। सावरकरचौक तक कोई भी साधन नजर नहीं आया। अब यहां समझ नहीं आ रहा है कि वाहन कोई मिलेगा या नहीं।
- घनश्याम
ग्राम गुगरवारा में घर है। ट्रेन पकड़कर भोपाल से आए हैं, अब गांव जाने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा है। समस्या इतनी विकट है कि किसी होटल में भी नहीं ठहर सकते हैं। जनता कर्फ्यू में होटल और रेस्टोरेंट बंद चल रहे हैं।
- सुुनील
बलरामपुर से अपनी ससुराल ललितपुर आए हैं। यहां पता चला कि बसें बंद हैं और टैक्सी भी नहीं चल रही हैं। ग्राम नाराहट जाना है, इसलिए घंटाघर तक पैदल चले आए हैं कि शायद कोई वाहन मिल जाए।
- संतोष कुमार
भोपाल से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में बैठे थे। ललितपुर स्टेशन पर उतरकर अब ग्राम मोगान जाने के लिए साधन ढूंढ रहे हैं, लेकिन कोई साधन नहीं मिल रहा है। यहां होटल, रेस्टोरेंट बंद होने से चाय और भोजन का भी इंतजाम नहीं हो पा रहा है।
- जानकी
नई बस्ती से ललितपुर स्टेशन जखौरा जाने के लिए आए थे, लेकिन कोई साधन नहीं मिल रहा है। जखौरा के पास ग्राम नगवास में गंगाजली का कार्यक्रम है, इसलिए उसमें शामिल होना जरूरी है। साधन के अभाव में बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
- मगनदास त्यागी
भिंड जिले से ललितपुर स्टेशन परक्षतरे हैं। यहां से मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिला जाना है, लेकिन कोई साधन नहीं मिल रहा है। यहां तक खाने, पीने की समस्या हो गई है। दुकानें भी सभी बंद है, अब यह नहीं सोच पा रहे हैं कि कहां जाए?
- मनगू
दिल्ली से लौटकर आए हैं और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के ग्राम सुजानपुरा जाना है। यहां पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा है। इस कारण बंद दुकान के बाहर बैठ गए हैं कि कोई शायद साधन मिल जाए।
- अड़कू
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