जिले में सरकारी विभागों में कम लोड पर अधिक बिजली की खपत की जा रही है। संयोजनधारक सरकारी विभाग के विद्युत भार नहीं बढ़ाए जाने से बिजली विभाग को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। स्थिति यह है कि बहुत से सरकारी कार्यालयों व सरकारी कालोनियों में भी एअर कंडीशनर चलाए जा रहे हैं, लेकिन एक किलोवाट के हिसाब से बिजली के बिल का भुगतान किया जा रहा है।
विद्युत विभाग द्वारा हर दो से तीन माह में विद्युत चोरी रोकने और बकाया वसूलने के लिए अभियान चलाया जाता है। विभाग द्वारा सरकारी विभागों में अभियान की शिथिलता के चलते सरकारी विभागों में वर्षों पूर्व के संयोजनों के आधार पर ही विद्युत भार पर विद्युत का उपभोग किया जा रहा है। बहुत से सरकारी विभाग व कालोनियां तो ऐसी हैं, जहां संयोजन तो मात्र एक या दो किलोवाट ही स्वीकृत किए गए हैं, जबकि वहां पर वातानुकूलित उपकरण धड़ल्ले से चल रहे हैं। कई सरकारी विभागों में तो आज भी पुरानी प्रणाली पर आधारित काले मीटर लगे हुए हैं। कुछ विभागों में तो मीटर भी नहीं लगे हैं, बस बिल भेजा जा रहा है। बिजली विभाग द्वारा हर माह इन विभागों व कालोनियों में मीटरों की रीडिंग करायी जाती है, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इस वजह से जहां विद्युत विभाग को ही लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं विद्युत खपत की भी सही जानकारी नहीं मिल पाती है। यही कारण है कि जनपद में आए दिन ओवरलोड की स्थिति बनी रहती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार उप्र पावर कार्पोरेशन के निर्देश पर सभी विभागों से वसूली के साथ खपत के अनुसार लोड बढ़ाने के लिए अभियान जल्द चलाया जाएगा।