ललितपुर। जनपद में एक दो नहीं 63 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की त्रासदी से जूझ रहे हैं। गंभीर स्थित देख 427 बच्चों को तो पोषण पुनर्वास केंद्र में भरती कराया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 2,02,815 बच्चों में से 1,53,996 की नापतौल के दौरान यह तस्वीर उभरकर सामने आई है। पर्याप्त पौष्टिक आहार की कमी के कारण किसी के हाथ पतले हो गए हैं तो किसी का पेट फूलकर बड़ा हो गया है।
बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए भी आंगनबाड़ी केंद्रों पर विभिन्न योजनाएं संचालित हो रही हैं। हर वर्ष इन योजनाओं पर भी करोड़ों रुपये व्यय किया जा रहा है। इसके बाद भी स्थितियां सुधरती दिखाई नहीं दे रही हैं। हाल में शासन के निर्देश पर आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत नौनिहालों की नापजोख व वजन करके कुपोषण की स्थिति का सर्वेक्षण किया गया है। इसके अंतर्गत जन्म से 6 माह तक के पंजीकृत 18,533 बच्चों में से 15,767 का परीक्षण किया गया। इस दौरान 12,842 बच्चे सामान्य पाए गए। इनके वजन में 500 ग्राम हर माह वृद्धि होती पाई गई। वहीं, 2,916 बच्चे कुपोषित व 9 अति कुपोषित मिले। ठीक इसी तरह छह माह से तीन वर्ष के दायरे में पंजीकृत 88,471 बच्चों में से 71,119 का वजन किया गया। इस दौरान 38,175 की वृद्धि सामान्य मिली। 32,639 नौनिहाल कुपोषण की समस्या से जूझते हुए पाए गए। इस आयु वर्ग में 305 बच्चे अति कुपोषित मिले। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 5 वर्ष के पंजीकृत 95,811 में से 67,110 का वजन किया गया, इनमें से 39,618 सामान्य पाए गए। वहींस 27,379 बच्चे कुपोषण से जूझते मिले। इस आयु वर्ग के 113 बच्चों की हालत बेहद गंभीर मिली। इस तरह सर्वेक्षण के दौरान जनपद के 62,934 बच्चे कुपोषण की त्रासदी से जूझते हुए पाए गए। 427 बच्चों की खराब स्थिति को देखते हुए उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भरती कराया गया है, ताकि उनकी स्थिति में सुधार हो सके। उल्लेखनीय है कि गरीबी से जूझते इस जनपद में स्थित नगरीय व ग्रामीण इलाकों में बच्चों की स्थिति बहुत ही दयनीय है, उनको समय से न तो भोजन मिल पाता है और न ही अन्य पौष्टिक आहार, जिसकी वजह से उनकी शारीरिक वृद्धि ठहर जाती है।
सहरिया बस्तियों में दिखाई देता कुपोषण
ललितपुर। जनपद स्थित ग्रामीण इलाकों की सहरिया बस्तियों में आसानी से कुपोषण की त्रासदी देखी जा सकती है। यहां दर्जनों की संख्या में पतले हाथ पैर के बच्चे आसानी से दिखाई दे जाते हैं। बड़े पेट के तमाम बच्चे यहां घूमते हुए मिल जाते हैं। जानकारों का कहना है कि समय से भोजन नहीं मिलने के कारण इनकी दशा दयनीय हो गई है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर संचालित होने वाली विभिन्न योजनाएं इनकी पहुंच से दूर बनी हुई हैं।