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जिमन तीन: जमीन है पर अधिकार नहीं

Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
Lalitpur
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ललितपुर। जमींदारी विनाश अधिनियम जनपद में लागू करते समय अधिकारियों की एक त्रुटि ने किसानों को उनकी जमीन के अधिकार से वंचित कर दिया। ककरीली पथरीली जमीन अभिलेखों में सीरदार के बजाए श्रेणी तीन में दर्ज कर दी। इन हालातों में किसान खेतीबाड़ी तो कर रहे पर उस जमीन के असली मालिक नहीं बन सके।
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जमीन देखने में भले ही एक जैसी लगती हो पर सरकारी अभिलेखों में उसके कई प्रकार होते हैं। सरकार किसानों को जमीन के एवज में तमाम सुविधाएं भी प्रदान करती है। भूमिधरी जमीन के काश्तकारों को सरकार की ओर से किसान क्रेडिट कार्ड मिलता है, साथ ही किसान बीमा समेत कृषि विभाग की विभिन्न सुविधाओं का उसे लाभ दिया जाता है। वहीं, श्रेणी तीन (जिमन-3) के काश्तकारों को न ही किसान क्रेडिट कार्ड मिलता है और न ही अन्य सुविधाएं। यहां तक कि उनके पास जमीन बेचने का भी अधिकार नहीं होता। सरकारी योजनाओं में भूमि अधिग्रहण के दौरान ऐसी जमीन पर काबिज किसानों को मुआवजा तक नहीं मिल पाता। निर्माणाधीन बांधों के दायरे में आई जिमन तीन की जमीन पर किसानी करने वाले ग्रामीण पिछले कई वर्षों से मुआवजा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जनपद में 14,312 हेक्टेयर भूमि श्रेणी तीन की अभिलेखों में दर्ज है। इस पर 32,166 किसान खेतीबाड़ी करते हैं। भारतीय किसान यूनियन, समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न दलों के नेता पिछले कई वर्षों से जिमन तीन की जमीन को भूमिधरी घोषित करने की मांग करते चले आ रहे हैं। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर राजस्व परिषद ने भी अपनी मुहर लगा दी है। अब सिर्फ कैबिनेट की बैठक मेें निर्णय लिया जाना शेष है। किसान मुख्यमंत्री के आगमन से इस मामले में बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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