सालों से एक ही वन रेंज में डटे हैं रेंजर व दरोगा
ललितपुर।
प्रदेश कैबिनेट द्वारा तय की गई तबादला नीति में वर्षों से एक ही स्थल पर डटे वन रेंजर व दरोगा इस बार हट पाएंगे, यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है। बता दें कि गत वर्ष भी वन विभाग में आधा दर्जन से अधिक कर्मियों के स्थानांतरण हुए थे, लेकिन वह टस के मस नहीं हुए हैं। पूर्व की भांति अपने तैनाती स्थलों पर कार्य कर रहे हैं।
गत दिवस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने वर्ष 2018-19 के लिए स्थानांतरण नीति को मंजूरी दी। इसमें जिलों में तीन और मंडलों में सात साल पूरा करने वाले अधिकारी हटाए जाएंगे। नीति में समूह क व ख के अधिकारियों के तबादले का प्रावधान किया गया है। समूह ख के अधिकारियों के तबादले विभागाध्यक्ष द्वारा किए जाएंगे। नीति के दायरे में 20 प्रतिशत तक तबादले की सीमा रखी गई है। स्थानांतरण की कार्रवाई एक अप्रैल से प्रारंभ होगी। इस नीति के दायरे में वन विभाग के रेंजर, डिप्टी रेंजर व दरोगा आ रहे हैं। बताते चले कि गत वर्ष भी जिले में तीन और मंडल में सात साल की समयावधि पूरी करने वाले अधिकारियों को तबादला नीति में लिया गया था। इसमें डीएफओ सहित एसडीओ, डिप्टी रेंजर व रेंजरों के स्थानांतरण हुए थे। स्थानांतरित डीएफओ, एसडीओ अन्य जनपदों के लिए कार्यमुक्त कर दिए गए, लेकिन डिप्टी रेंजर, दरोगाओं ने अपने चार्ज नहीं छोड़े। एक दो कर्मी तो अपने तबादले रुकवाने में सफल हो गए। वर्तमान में एक डिप्टी रेंजर का मामला विभागीय अधिकारियों के लिए गले की फांस बन गया है। बीते दिसंबर माह में डीएफओ गोविंदशरण ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए डिप्टी रेंजर प्रागीलाल को छोड़ दिया था, लेकिन ललितपुर रेंजर उनसे लगातार काम लेते रहे। अब जब योगी सरकार ने नए सिरे से तबादला नीति को मंजूरी दे दी है तो वन विभाग फिर सुर्खियों में आ गया है। जिन अधिकारियों ने स्थानांतरण के बाद चार्ज नहीं छोड़ा है, वे एक बार फिर इस नीति के दायरे में आ गए हैं और जो अधिकारी पिछली दफा बच गए थे, उन पर भी तबादले की तलवार लटकने लगी है। सूत्र बताते हैं कि विभाग में तीन रेंजर, इतने ही डिप्टी रेंजर व आधा दर्जन से अधिक दरोगाओं को एक ही स्थल पर वर्षों बीत गए हैं। यहां तक कि वन रक्षकों की रेंजों में भी परिवर्तन नहीं किया गया है।
आदेश प्राप्त होने पर तैयार होगी सूची
स्थानांतरण नीति तय हो गई है, लेकिन अभी तक उसका आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही आदेश की कापी मिलती है, वैसे ही अधिकारियों की सूची तैयार करने का काम प्रारंभ हो जाएगा। रेंजरों की सूची हेडक्वार्टर से व फॉरेस्टरों की सूची वन संरक्षक कार्यालय से बनेगी।
गोविंद शरण, डीएफओ ललितपुर