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स्टाइल से समझौता नहीं, जो दिखाए सो कर लो

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नियम तोड़ देंगे, स्टाइल से समझौता नहीं
ललितपुर। वाहन चालक यातायात के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। स्टाइलिश दिखने की चाहत में युवा दो पहिया व चार पहिया वाहनों पर डिजाइन वाली नंबर प्लेट लगवा रहे हैं। उन्हें कानून का जरा भी डर नहीं है। वहीं, कई अधिकारियों की गाड़ियों की नंबर प्लेट भी नियम विपरीत तरीके से लगाई गई है।
वाहनों का क्रमांक उनकी पहचान होता है, ताकि कोई घटना होने पर वाहन स्वामी की पहचान हो सके। नियमानुसार निजी वाहनों पर सफेद नंबर प्लेट लगी होनी चाहिए और उस पर साफ अक्षरों व अंकों में वाहन का क्रमांक काले रंग से अंकित होना चाहिए, जबकि जनपद आधे से अधिक वाहनों पर इसके विपरीत नंबर प्लेट लगी हुई है। हर रोज शहर की सड़कों पर स्थानीय व बाहरी जनपद और राज्यों में पंजीकृत बीस हजार से अधिक बाइक व स्कूटर दौड़ते हैं। इनमें से बीस प्रतिशत से अधिक बाइक ऐसी हैं जिनमें सफेद रंग की जगह काली, गोल्डन या फिर लाल रंग की प्लेट लगी हुई है, वहीं कइयों पर काले की जगह अन्य रंगों से स्टाइलिश अंक लिखे हैं। वहीं कुछ ने तो नंबर प्लेट पर काफी बारीक अंक लगाए हुए हैं, नंबर प्लेट की आधे से अधिक जगह पर टेंटू व अन्य कलाकृति बनाए हुए हैं। यह तो हुए बाइकों के पीछे लगी नंबर प्लेट की बात, यदि बाइक व स्कूटरों में आगे लगी नंबर प्लेट की बात करें तो मात्र बीस प्रतिशत बाइक व स्कूटर ऐसे होगों, जिनके आगे की नंबर प्लेट पर नंबर अंकित होगा। नंबर की जगह प्लेट पर व्यक्ति या उसके चहेते का नाम, भगवानों का नाम, राजनीतिक पार्टियों के नाम व पदों के नाम लिखे हुए हैं। इसमें सबसे आगे पुलिस व पुलिस कर्मियों के घरवाले हैं। लगभग सभी पुलिस कर्मियों व उनके परिजनों की बाइक पर आगे की नंबर प्लेट पर बड़े-बड़े अंकों में पुलिस लिखा रहता है। कुछ लोग तो फर्जी में ही अपनी गाड़ी पर पुलिस लिखवा लेते हैं। गाड़ियों पर बड़े-बड़े अक्षरों में पुलिस लिखवाने के पीछे मंशा यह होती है कि वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस उनकी गाड़ी को नहीं पकड़ेगी व दूसरी यह कि चोर भी गाड़ी चोरी करने से पहले सोचेगा। यहां यह सवाल उठता है कि जब पुलिस वाले स्वयं ही नियमों का पालन नहीं करते हैं तो फिर वह किसी को कैसे रोक सकेंगें। यही वजह भी है कि पुलिस खुद इस संबंध में कार्रवाई करने से कतराती है।
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घटना के बाद आती है सुध
शहर व जनपद में कोई आपराधिक घटना घटित हो जाती है तो फिर इसके बाद पुलिस कर्मियों को वाहनों के नंबर प्लेटों की सुध आती है। जब बाइकों के सहारे किसी आपराधिक घटना को अंजाम दिया जाता है, तो वाहनों पर लिखे स्टाइलिश नंबर या खाली नंबर प्लेट के कारण वाहन व वाहन स्वामी की पहचान नहीं हो पाती है। इसके बाद फिर पुलिस को सुध आती है और शहर में बिना नंबर या फिर नंबर पहचान न आने वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाती है और बाद में अभियान को बंद कर दिया जाता है। यदि वाहनों पर सही व मानकों के अनुसार नंबर लिखे रहेंगे तो इससे पुलिस को ही आपराधिक घटनाएं रोकने में सहायता मिलेगी। नंबर के ही माध्यम से वाहन स्वामी का नाम भी आसानी से पता लग जाता है, तो काफी सहायक होता है।
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अधिकारियों की गाड़ियों पर भी मानकों के विपरीत नंबर प्लेट
जनपद के अधिकतर सरकारी विभागों में अधिकारियों की सुविधा के लिए किराए के चार पहिया वाहन लेगे हैं। किराए पर लगे यह वाहन टैक्सी परमट होते हैं और नियमानुसार टैक्सी परमिट वाहनों की नंबर प्लेट पीले रंग की होना चाहिए और काले रंग से नंबर लिखा होना चाहिए। लेकिन अधिकारियों द्वारा उपयोग किए जा रहे आधे से अधिक टैक्सी परमिट वाहनों में नियमों के विपरीत सफेद रंग वाले नंबर प्लेट लगी हुई हैं। बुधवार को स्थानीय विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक आयोजित की जा रही थी। इस दौरान लगभग विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एक दर्जन से अधिक गाड़िया खड़ी थी, जो सभी किराए की है। इनमें से किसी भी गाड़ी की नंबर प्लेट पर नियमानुसार पीले रंग की नंबर प्लेट नहीं लगी हुई थी। ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी एआरटीओ व पुलिस विभाग की है, लेकिन जहां सरकारी अधिकारियों के वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात आती है तो वह कतरा जाते हैं। यातायात का यह नियम जनपद में केवल आम नागरिकों पर ही लागू होता है।
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इस ओर नहीं दिया कभी ध्यान
वाहन की नंबर प्लेट की ओर कभी ध्यान भी नहीं दिया है। यदि नंबर प्लेट मानकों के विपरीत है तो जल्द ही उसको ठीक कराया जाएगा और साथ ही विभाग के सभी अधिकारियों को भी अपने-अपने वाहनों की नंबर प्लेट को मानक के अनुरुप कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
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-प्रवीण कुमार लक्ष्यकार
मुख्य विकास अधिकारी।
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दो-तीन दिन के लिए ही मिला है चार्ज
अभी केवल दो-तीन दिन के लिए ही एआरटीओ प्रवर्तन का चार्ज मिला है। जनपद के लिए स्थानांतरित किए गए प्रवर्तन एआरटीओ जल्द ही अपना चार्ज ले लेंगे। इसके बाद अभियान चलाना संभव होगा।
-सतेंद्र कुमार
एआरटीओ प्रशासन, प्रभारी प्रवर्तन।
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