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जिले हुई 85 प्रतिशत खरीफ फसलों की बुवाई

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rice - फोटो : rice
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बूंदाबांदी से खरीफ की फसलों को राहत
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85 प्रतिशत खरीफ फसलों की बुवाई हुई, उड़द, सोयाबीन व मक्का अधिक बोया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले में 85 प्रतिशत खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो गई है। इसमें उड़द, सोयाबीन व मक्का अधिक बोया गया है। लेकिन, बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ रही है। खेतों की नमी कम होती जा रही है, जिससे फसलें सूखने की स्थिति में आ रहीं है। हालांकि, कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी होने से राहत बनी हुई है।
मानूसन के दस्तक देते ही अच्छी बारिश हुई और खेतों में नमी आ गई। इससे किसानों से बुवाई शुरु कर दी थी। 17 दिनों में किसानों 85 प्रतिशत बुवाई पूरी कर ली है। इसमें 65 से 70 प्रतिशत किसानों ने खेतों में उड़द की फसल बोई है। शेष में 30 प्रतिशत जमीन पर अन्य फसलें बोई गईं हैं।
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खरीफ की फसल की बुवाई के लिए पांच से छह इंच तक पानी की आवश्यकता होती है। ऐसी नमी में फसल बोई जाने से अच्छी होती है। जब तक खेतों में खड़ी फसल आठ से दस इंच की हो, तब तक के लिए खेतों में पानी केवल बहता रहना चाहिए। दस इंच तक फसल होने से पानी के बहाव में खेत की उर्वरा क्षमता पानी के साथ नहीं बहती है। क्योंकि, लगातार पानी गिरने से जमीन के अधिक अंदर तक पानी चला जाता है।
लेकिन, बीते दिनों से जिले में बारिश नहीं हो रही है। इससे किसानों को फसलों की चिंता सताने लगी है। काली मिट्टी के खेतों में अभी फसलें ठीक हैं, लेकिन जहां पर पतली मिट्टी है, वहां पर बारिश नहीं होने से समस्या बढ़ रही है और यदि कुछ दिन और बरसात नहीं हुई तो फसलों को नुकसान होना तय है।
पानी नहीं मिला तो नष्ट हो जाएगी मूंगफली की फसल
तालबेहट और बार क्षेत्र में पतली जमीन है। ऐसे में मूंगफली की फसल बोने वाले क्षेत्र में बरसात की अधिक आवश्यकता है। मूंगफली को कुछ दिन और पानी नहीं मिला तो पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी। उड़द की फसल के लिए कम पानी भी ठीक पैदावार देता है। कहीं- कहीं हल्की बूंदाबांदी होने से फसलों को राहत भी मिल रही है।
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यह है बुवाई का लक्ष्य
खरीफ की फसलों के लिए 287218 हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 212872 हेक्टेयर में उड़द और 17111 हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई का लक्ष्य था, लेकिन किसानों ने सोयाबीन 20 हजार हेक्टेयर में बोया है। मूूंग के लिए 7641 हेक्टेयर, मक्का के लिए 25137 हेक्टेयर, मूंगफली 13218 हेक्टेयर, तिल 92 सौ हेक्टेयर व ज्वार 264 हेक्टेयर का लक्ष्य है। इसके अलावा अन्य फसलों के लिए लगभग दो हजार हेक्टेयर में बोई जाएगी। किसानों ने अरहर आठ से दस हेक्टेयर में बोई है। अब तक 85 प्रतिशत की बुवाई पूरी हो चुकी है।
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जिले में छींटानुमा बरसात कुछ क्षेत्रों में हो रही है। इसी तरह यदि संपूर्ण जिले में बरसात होती रहे तो फसलें नुकसान से बच सकेंगी।
- आरबी पटेल, प्राविधिक सहायक
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खरीफ की फसल की बुवाई किसानों ने मानसून के आते ही शुरु कर दी थी। अब तक जिले में 85 प्रतिशत बुवाई पूरी कर ली है।
- गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी
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फोटो- 31
बिरधा और बार में किसानों को है नुकसान की आशंका
बिरधा/बार। कस्बा बिरधा और आसपास के चालीस गांवों में पिछले पंद्रह दिन से पानी नहीं बरसा है। ऐसे में किसानों को फसलें मुरझाने का खतरा मंडरा रहा है। फसलों को पानी की आवश्यकता है, लेकिन पानी नहीं बरस रहा है।
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शुरूआत में अच्छी बरसात होने के कारण किसानों को उम्मीद थी कि इस बार अच्छी बरसात होगी और खरीफ की फसल भी अच्छी होगी। किसानों ने उड़द, मूंग, सोयाबीन आदि फसलों की बुवाई कर दी है। लेकिन, बुवाई के बाद से पानी नहीं बरसा है। ऐसे में किसान चिंतित हैं कि यदि जल्द ही पानी नहीं बरसा तो उन्हें बहुत नुकसान हो जाएगा। उधर, विकासखंड बार मुख्यालय के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पानी नहीं बरसने के कारण किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। एक पखवाड़े पूर्व हुई बरसात में खेतों में खरीफ की फसलें जैसे उड़द, मूंगफली, मक्का सोयाबीन, तिल आदि की बुवाई हो गई थी। लेकिन, 15 दिन से पानी नहीं बरसने के कारण अब फसलें सूख रही हैं। किसानों ने देवी-देवताओं की शरण ले रखी है। वह भजन- कीर्तन कर रहे हैं। इस वर्ष किसानों ने तीन से चार गुने दामों में फसलों का बीज खरीदा और खेतों में डाल दिया। बीज अंकुरित होकर पत्तियां तो निकल आईं, लेकिन अब सूखने लगी हैं। गजेंद्र सिंह बुंदेला, इंद्रजीत सिंह चौहान ग्राम प्रधान बरोदियाराईन, मुन्नालाल रजक, बिरधा, लखनलाल झा, ग्राम धमना, कीरत सिंह बाबा, किसान नेता-बार और रविंद्र कुमार दुबे, किसान-बार का कहना है कि पानी नहीं बरसने के कारण सोयाबीन, मक्का और मूंगफली की 35 से 40 प्रतिशत तक फसलें सूख गई हैं। यदि यही स्थिति रही तो किसान बरबाद हो जाएगा। खरीफ की फसल पिछले साल अतिवृष्टि की भेंट चढ़ गई थी और इस वर्ष पानी नहीं बरसने के कारण फसलें खेतों में सूख रही हैं। किसान क्या करें, कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
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फोटो- 30
कैप्शन- गजेंद्र सिंह बुंदेला
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फोटो- 32
कैप्शन- इंद्रजीत सिंह चौहान
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फोटो- 33
कैप्शन- मुन्नालाल रजक
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फोटो- 34
कैप्शन- लखनलाल झा
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फोटो- 35
कैप्शन- कीरत सिंह बाबा
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फोटो- 36
कैप्शन- रविंद्र कुमार दुबे
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