महिला अस्पताल की कारगुजारियों से अधिकारी भी त्रस्त
ललितपुर। जिला महिला अस्पताल प्रशासन की खामियों से जहां आएदिन मरीज परेशान होते रहते हैं, वहीं अब अधिकारी भी इनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में संचारी रोग अभियान की बैठक करते हुए एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद भी सीएमओ ने अस्पताल प्रशासन का बचाव करने का प्रयास किया। मालूम हो कि इससे पहले भी डीएम ने महिला अस्पताल पर सवालिया निशान खड़े किए थे।
जिला महिला अस्पताल आए दिन सवालों के घेरे में बना रहता है। यहां आने वाले मरीज जहां अल्ट्रासाउंड से लेकर प्रसव तक के लिए रुपये लिए जाने की शिकायत करते रहते रहते हैं, वहीं चिकित्सकों की लापरवाही के चलते मरीजों व बच्चों की मौत होने के भी आरोप लगते रहते हैं। इसके अलावा प्रदेश स्तर पर महिला अस्पताल को कई अवार्ड भी प्राप्त हो चुके हैं। इस पर कुछ दिन पहले पत्रकार वार्ता के दौरान डीएम के सामने खामियां बताए जाने पर उन्होंने कहा था कि ऐसे प्रमाणपत्रों का क्या फायदा जब मरीजों को सुविधाएं नहीं प्राप्त हो रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों पर लगाम लगाइए, यदि वह छोड़कर जाना चाहते हैं तो जाने दो। जब इताने डॉक्टरों की जिले में कमी है तो एक और की हो जाएगी, कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन मनमानी पर रोक लगनी चाहिए। डीएम की हिदायत के बाद भी अस्पताल की व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ और न ही उगाही बंद हुई। हाल ही में महिला अस्पताल के एक कर्मचारी द्वारा अल्ट्रासाउंड के नाम पर रुपये लेने का वीडियो भी वायरल हो चुका है। शनिवार को हुई संचारी रोग अभियान की बैठक के दौरान विभिन्न विभाग के अधिकारियों के सामने अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग को जमकर फटकार लगाई। जानकारी के अनुसार एक मरीज ने एडीएम से प्रसव के लिए भर्ती महिला की उचित देखभाल न करने की शिकायत की। इस पर एडीएम ने महिला अस्पताल सीएमएस को फोन कर निर्देशित किया। इस पर सीएमएस ने फोन कर एडीएम को महिला की गंभीर हालत होने की जानकारी देते हुए उसे रेफर कर दिया। इसके बाद उस महिला का ललितपुर के ही एक निजी अस्पताल में सामान्य प्रसव हो गया। इसकी जानकारी मिलने पर एडीएम ने नाराजगी जाहिर की। यही नहीं उन्होंने सीएमओ को निर्देशित किया कि महिला अस्पताल में चल रही उगाही को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए और वहां फैली अव्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए। एडीएम ने कहा कि जिस महिला के बारे में सीएमएस गंभीर स्थिति होने की जानकारी दे रहे हैं, उसी महिला का प्रसव एक निजी अस्पताल में सामान्य कैसे हो गया। यदि मरीजों से रुपये नहीं मिलेंगे तो इलाज ही नहीं किया जाएगा। इस पर सीएमओ ने जांच करवाकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। मालूम हो कि इससे पहले भी महिला अस्पताल पर लगने वाले आरोपों की जांच करवाई गई थी। अभी तक इन जांचों की जानकारी और कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी नहीं हो सकी है। हर मामले में जांच की बात कहते हुए अधिकारी कागजी कार्रवाई शुरू करते हुए जांच शुरू कर देते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों की जांच अभी तक पूरी ही नहीं हो सकी है या फिर फाइलों में ही सीमित हो गई है।
महिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर फटकार लगाई थी। महिला अस्पताल से रेफर महिला का शहर के ही एक निजी अस्पताल में सामान्य प्रसव हो गया था। इस कारण अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश दिए थे।
योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी
सीएमएस से बात की तो उन्होंने बताया कि महिला की हालत गंभीर थी, इस कारण रेफर कर दिया गया था। महिला अस्पताल प्रशासन इस मामले में दोषी नहीं है और फिर भी मामले की जांच करवाई जाएगी।
डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
मेडिकल साइंस के आधार पर एडीएम को प्लेटलेट्स काउंट होने की जानकारी दी गई थी। क्योंकि इस स्थिति में मरीज की हालत बिगड़ने की संभावना रहती है। कई बार ऐसी स्थिति में सब कुछ सामान्य हो भी जाता है और समस्या नहीं होती है। इस मामले में भी ऐसा ही हो गया।
हरेंद्र सिंह चौहान, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, महिला अस्पताल