अस्पष्ट आदेश ने नवनियुक्त शिक्षकों की बढ़ाई परेशानी
ललितपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में नवनियुक्त सहायक अध्यापकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच के मामले में अस्पष्ट आदेश के चलते शिक्षक बेवजह परेशान हो रहे हैं। विभाग ने 17 विश्वविद्यालयों के नाम शुल्क के रूप में ड्राफ्ट मांगा है। लेकिन अन्य के लिए कुछ नहीं कहा गया है। इसके शिक्षक असमंजस की स्थिति बन गई है।
बीते माहों में 41556, 12460 व उर्दू शिक्षकों की भर्ती हुई है लेकिन इनमें अधिकांश को अब तक पहला वेतन नहीं मिल पाया है। इसकी वजह शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन नहीं हो पाना है। इस संबंध में विभागीय अफसरों ने प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। बीते दिनों विभाग ने सत्रह विश्वविद्यालयों की सूची जारी की है। जिसमेें प्राथमिक विद्यालय के नवनियुक्त सहायक अध्यापकों से उनके शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच हेतु शुल्क के रूप में ड्राफट मांगा गया है। इसमें बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय दिल्ली जैसे कई विश्वविद्यालयों के नामों को छोड़ दिया गया है। जिससे इन विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त करने वाले सहायक अध्यापक असमंजस की स्थिति में आ गए हैं। वह यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें सत्यापन के लिए ड्राफ्ट बनवा है या नहीं। इस कारण वे विभाग के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं।
मथुरा जिले के फर्जीबाड़े से सर्तक शासन
बीते माहों में मथुरा में शिक्षक भर्ती का बड़ा फर्जीबाड़ा उजागर हुआ। इसके बाद भी शासन सर्तक हो गया है। पहले नवनियुक्त शिक्षकों को किन्हीं दो शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के उपरांत पहली वेतन निर्गत कर दी जाती थी लेकिन मथुरा शिक्षक फर्जीबाड़ा के बाद सभी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के उपरांत वेतन आहरित करने के लिए कहा गया है। जिससे ऐसे शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई हैं।
कुछ विश्वविद्यालयों ने शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन की एवज में शुल्क मांगा है तो कई विश्वविद्यालय इस संबंध में कुछ भी नहीं कह रहे हैं। जिस वजह से शुल्क मांगने वाले विश्वविद्यालयों की ही सूची जारी की गई है। जो शिक्षक पूर्व में सत्यापन के लिए ड्राफ्ट दे चुके हैं, उन्हें दोबारा ड्राफ्ट नहीं बनवा है।
भरत कुमार वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी