घर की रोशनी होती बेटियां, जागरूकता फैलाने पर बल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। राष्ट्रीय बालिका दिवस की पूर्व संध्या के अवसर पर प्रभावना जनकल्याण परिषद एवं करुणा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित परिचर्चा में बेटियों को घर की रोशनी बताया गया। इस दौरान बेटियों को बचाने का संकल्प लिया गया।
आधुनिकता के दौर में भी कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई विद्यमान है। लड़का-लड़की में भेद नहीं करने के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस दिन सभी को कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराई को मिटाने के लिए संकल्प लेना होगा। डॉ. सुनील जैन संचय का कहना है कि बेटी दो कुलों की लाज रखती है। बेटियां बेटों से कहीं भी कम नहीं हैं। शिक्षिका लक्ष्मी सिरोठिया का मानना है कि बेटियां आज बेटों की बराबरी पर ही हैं। चाहे वह नौकरीयों में हो या अन्य किसी भी क्षेत्र में। बेटियां आगे ही रहती हैं। सक्षम संस्था के अध्यक्ष अक्षय अलया का कहना है कि बेटा-बेटी में भेदभाव बहुत बड़ा अपराध है। बेटी ही सृष्टि का मूल आधार है, हमें उसके जन्म पर उत्सव मनाना चाहिए। करुणा केंद्र मडावरा के संयोजक पुष्पेंद्र जैन कहना है कि वह माता-पिता बडे़ ही सौभाग्यशाली होते हैं, जिनकी बेटियां होती हैं। बेटों से भी बढ़कर बेटियां आज अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं। शिक्षिका मधू साहू का कहना है कि राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी से ही हुई है। जिनके इस पद पर सुशोभित होने पर राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। लड़कियां समाज में बोझ नहीं होती हैं बल्कि भगवान का दिया हुआ खूबसूरत तोहफा होती हैं। जैन शिक्षक सामाजिक समूह के महामंत्री शीलचंरद्र शास्त्री का कहना है कि बेटी पढ़-लिखकर उच्च पदों पर पदस्थ होकर देश व समाज का मान बढ़ा रहीं हैं। बेटियों की इस उपलब्धि से माता-पिता अपने लिए गौरवन्वित कर रहे हैं। अहिंसा सेवा संगठन के अध्यक्ष विशाल पवा का कहना है कि आज हमें राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जागरूकता अभियान चलाने आवश्यकता पड़ रही है जबकि भारतीय संस्कृति में जहां नारी को देवी लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती के रूप में देखा जाता है। स्याद्वाद बाल संस्कार केंद्र विद्यालय की प्रधानाचार्य सीमा जैन का कहना है कि बेटियां हमारे घर-आंगन में तुलसी की तरह ही हैं। बेटियों से ही हम किसी कार्य की सफलता की तुलना कर सकते हैं।