तुलसीदास की रचनाएं युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत
ललितपुर। महाकवि तुलसीदास की जयंती पर गोष्ठियों की धूम रही। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि उनकी रचनाएं युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। श्री जगदीश मंदिर मण्डपम में आयोजित गोस्वामी तुलसीदास जयंती का शुभारंभ गोस्वामी जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। संरक्षक पं चंद्र विनोद हुण्डैत ने कहा कि रामचरित मानस का नियमित पाठ एवं भक्त शिरोमणि तुलसीदास जी की जयंती को मनाने की परम्परा लंबे समय से चली आ रही है। तुलसी की है यही पुकार, राम राज्य हो फिर साकार विषय पर बोलते हुए सभा अध्यक्ष नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि रामराज्य सिर्फ अयोध्या तक सीमित न होकर तीनों लोकों तक फैला था, इसलिए तुलसी कहते हैं कि ‘‘रामराज बैठे त्रिलोका, गए शोक हर्षित भए लोगा। तुलसी का मूल संदेश मानव प्रेम है। इस मौके पर सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे, बाबूलाल द्विवेदी (छिल्ला), नेहरू महाविद्यालय समिति अध्यक्ष प्रभात दीक्षित, नवल किशोर सोनी, अध्यक्ष विश्वहिन्दू परिषद एवं मंदिर समिति के अध्यक्ष सुधांशु शेखर हुण्डैत, डा जनक किशोरी शर्मा, भगवत नारायण बाजपेई, बाबा कांशीराम साहू, सुरेंद्र नारायण शर्मा, कैलाश दुबे, शिव कुमार चतुर्वेदी, राम गोपाल नामदेव, रामकुमार शर्मा, उमाशंकर विदुआ, आचार्य सत्यनारायण तिवारी, महेंद्र रावत, भगवत दयाल सिंधी, रमेश सोनी, मगनलाल एवं आप नेता मुरारीलाल जैन भी विचार रखे। संचालन समिति के महामंत्री विभाकांत हुण्डैत ने किया। अंत में आभार संयोजक आदर्श कांत हुण्डैत ने व्यक्त किया है। उधर, मुहल्ला चौबयाना स्थित बाबाघाट तुलसीमानस मंदिर में तुलसी जयंती मनाई गई। वक्ताओं ने कहा कि तुलसीदास एक महान संत थे, उनकी भक्ति अपने आप में मिशाल है। इस मौके पर आलोक चौबे, मानू शर्मा, पार्थ चौबे, राहुल चौबे, नीतेश संज्ञा, दीपक कौशिक, राजेंद्र सिंह राजावत, शुभम रैकवार, अरविंद सोनी, मनु चतुर्वेदी उपस्थित रहे।