समोवशरण विधान में बढ़ती हैं परिणामों की विशुद्धि
ललितपुर।
अतिशय क्षेत्र क्षेत्रपाल जैन मंदिर में अर्हचक्र समोवशरण विधान महाअर्चना में रविवार को विधान के दौरान इंद्र व इंद्राणियों ने 1008 अर्घ प्रभु के चरणों में समर्पित किए। इस मौके पर मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा समोवशरण विधान के माध्यम से इंद्र इंद्राणियों ने असीम पुण्य का संचय किया है और समय परिणामों में विशुद्धि बढ़ाने का आया है। विधान में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भावनाएं भी कल्याणकारी आती हैं।
रविवार की सुबह क्षेत्रपाल मंदिर में बने प्रभु के मनोज्ञ समोवशरण के सम्मुख विधानाचार्य प्रदीप भैया सुयश ने इंद्र व इंद्राणियों को संगीतमय पूजन-अर्चन एवं शांतिधारा कराई। भगवान आदिनाथ के समोवशरण आचार्य विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद और मुनि अभय सागर प्रभात सागर पूज्यसागर महाराज के ससंघ सानिध्य में नित्य हो रही है। विधान के उपरांत धर्मालुजन समोवशरण मंडप की परिक्रमा के माध्यम से अपने शुभ भावों का संचय कर रहे है। सायंकाल आजादपुरा में वैद्य किशनचंद्र राजेंद्र कुमार राजू जड़ीबूटी परिवार के आवास से महाआरती निकली जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए क्षेत्रपाल मंदिर पहुंची जहां श्रावकों ने भक्तिपूर्वक आरती की। इसके उपरांत कलाकार सचिन शर्मा दिल्ली द्वारा धार्मिक नाटिका का मंचन किया गया। व्यवस्थाओं को संयोजित करने में अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डा. अक्षय टड़ैया, मंदिर प्रबंधक राजेंद्र जैन, पार्षद पंकज जैन मोदी, संयोजक प्रदीप सतरवांस, मनोज जैन बबीना, विजय जैन, अक्षय अलया, संजीव जैन, अभिषेक अनौरा, सत्येंद्र गदयाना, आनंद जैन धनगौल, अशोक दैलवारा, सुधीर जैन आदि प्रमुख रूप से सक्रिय हैं।
विश्व शांति महायज्ञ की पूर्णाहुति आज
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद और मुनि अभय सागर, प्रभात सागर, पूज्य सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में क्षेत्रपाल मंदिर में चल रहे अर्हचक्र समोवशरण विधान की पूर्णाहुति विश्वशांति महायज्ञ हवन दो अक्टूबर को प्रात:काल सम्पन्न होगा, जिसमें विधान के मुख्य पात्र और समाज के प्रमुख लोगों को सम्मानित किया जाएगा।