कुपोषण को समाप्त करने का जिम्मा पांच विभाग पर
ललितपुर। शासन ने बच्चों एवं महिलाओं में पनप रही कुपोषण की बीमारी के लिए अफसरों की जवाबदेही तय कर दी है। अब पांच विभागों को समन्वय स्थापित कर इस बीमारी से लड़ना होगा। इसके लिए विभागवार अंक भी निर्धारित कर दिए गए हैं।
देश में खानपान एवं साफ सफाई के प्रति जागरुकता आने के बाद भी कुपोषण से छुटकारा नहीं पाया जा सका है। जिला भी इससे अछूता नहीं है। यहां 44,710 कुपोषित एवं 12,924 बच्चे अतिकुपोषित हैं। इस तरह के हालात अन्य जिलों में हैं। जिसे ध्यान में रखकर शासन ने विभागों को जिम्मेदार बनाया है। विभागवार कार्य को विभाजित करते हुए उनके अंक निर्धारित कर दिए गए हैं। जिसमें स्वास्थ्य विभाग के 25 अंक, शिक्षा के 15 अंक, बाल विकास के 15 अंक, पंचायती राज विभाग के 40 अंक, ग्राम्य विकास विभाग के 05 अंक हैं। डीएम मानवेंद्र सिंह ने इसके अनुपालन में इन सभी पांच विभागों के अफसरों को बेसलाइन सर्वे करते हुए कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी दीपिका घोष का कहना है कि स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग आयरन, फोलिक एसिड की गोलियों का वितरण करेगे तो बाल विकास विभाग गर्भवती व बच्चों को पौष्टिक आहार मुहैया कराएगी। पंचायती राज विभाग खुले में शौच को समाप्त करने के लिए कार्य करेगा। वहीं, ग्राम्य विकास विभाग मनरेगा के माध्यम से रोजगार मुहैया कराकर कुपोषण को दूर करने का प्रयास करेगा। जो अच्छा कार्य करेगा, उसे तय अंकों के आधार पर अंक आवंटित किए जाएंगे। इससे विभाग के कार्यो की समीक्षा आसानी से हो सकेगी।
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मेगा कॉल सेंटर की तैयारी लगभग पूरी
लखनऊ स्तर पर मेगा कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। जिससे आंगनबाड़ी केंद्र पर पंजीकृत लाभार्थी को फोन आएंगे। जो न केवल योजनाओं की जानकारी देगा बल्कि योजनाओं की हकीकत तक पहुंचने का प्रयास करेगा। जिला स्तर पर लाभार्थियों के फोन एवं नामों की फीडिंग कर ली गई है। जिसकी सूचना लखनऊ को भी भेजी गई है।