बिरधा ब्लॉक की कई पंचायतों में सहरिया परिवार झोपड़ियों में रहने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
जाखलौन/ललितपुर। आज़ादी के 77 वर्षों बाद भी जिले के सैकड़ों आदिवासी परिवार सरकारी आवास योजनाओं से वंचित हैं। शासन से हर साल हजारों आवासों के लिए धनराशि जारी होने के बावजूद पात्र गरीबों तक यह लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। हालात यह हैं कि कई सहरिया परिवार आज भी पन्नी डालकर झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं, जबकि कई अपात्र लोग पक्के मकानों में रह रहे हैं।
जनपद की 415 ग्राम पंचायतों और छह ब्लॉकों में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार बसे हैं। बिरधा ब्लॉक की ग्राम पंचायत कपासी, मादोन और पिपरई में सहरिया समुदाय के परिवार अपनी आजीविका मजदूरी और जंगल से लकड़ी बेचकर चलाते हैं। इन गांवों में आज भी अनेक परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक आवास नहीं मिला है।
ग्राम पंचायत कपासी के महुआवारा सहरिया बस्ती के लोगों ने आरोप लगाया कि आवास स्वीकृति के नाम पर जिम्मेदार उनसे 15 हजार रुपये की मांग करते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे यह राशि देने में सक्षम नहीं हैं। इसी वजह से उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बारिश हो या कड़ाके की सर्दी बच्चों व बुजुर्गों को झोपड़ी में रातें गुजारना बेहद मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव में रोजगार उपलब्ध न होने से उन्हें पलायन की मजबूरी झेलनी पड़ती है। कई परिवार साल में कई महीनों तक बाहर मजदूरी करने को विवश हैं।
वर्जन
नई सूची में कई आवास स्वीकृत हुए हैं। इन परिवारों की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि नाम न हो, तो अगली सूची में शामिल किया जाएगा। आवास के नाम पर कोई धन न दें। यदि कोई मांगता है, तो तुरंत ब्लॉक या जिला मुख्यालय पर शिकायत करें। - इरशाद अहमद , खंड विकास अधिकारी, बिरधा