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जिला योजना में धन देने में शासन दिखा रहा कंजूसी

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धन देने में शासन दिखा रहा कंजूसी
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ललितपुर।
जिला योजना में धन अवमुक्त करने के मामले में शासन कंजूसी बरत रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में 25093 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है, इसके सापेक्ष 11805.12 लाख रुपये अब तक अवमुक्त हो सके हैं। इन हालात में कई विभागों को तो कुछ भी प्राप्त नहीं हो सका है।
जिला योजना में स्थानीय विभाग अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर धनराशि की मांग करते हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 43 विभागों ने जिला योजना में धन मांगा है। इस तरह बीते माह में कुल मिलाकर 25093 लाख रुपये के बजट को जिला योजना की बैठक में रखा गया था, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया था। लेकिन, जब धनराशि अवमुक्त करने की बारी आई तो शासन ने कंजूसी दिखाना शुरू कर दिया। वित्तीय वर्ष के अंतिम माह तक कुल 11805.12 लाख रुपये ही अवमुक्त किए जा सके हैं। ऐसे में कई विभागों को धेला भी नसीब नहीं हो सका है तो कइयों को स्वीकृत धन के सापेक्ष कम धनराशि प्राप्त हुई है। इस स्थिति में सरकारी विभागों के विभिन्न कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो कृषि विभाग ने अवमुक्त धनराशि का 59.90 प्रतिशत, पशुपालन ने 86.63 प्रतिशत, दुग्ध विकास ने 80.52 प्रतिशत, वन विभाग ने 85.62 प्रतिशत, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने 60.83 प्रतिशत, भूमि विकास और जल संसाधन ने 64.09 प्रतिशत, रोजगार कार्यक्रम में शत प्रतिशत, लघु सिंचाई ने 39.87 प्रतिशत, खाद्य और ग्रामोद्योग ने 42 प्रतिशत, सड़क व पुल पर शति प्रतिशत, प्राथमिक शिक्षा में 86.11 प्रतिशत, प्रादेशिक विकास दल ने शत प्रतिशत, ग्रामीण स्वच्छता में शत प्रतिशत, ग्रामीण आवास में शत प्रतिशत, अनुसूचित जाति कल्याण में 85.57 प्रतिशत, सेवायोजन ने 58.11 प्रतिशत की धनराशि खर्च व्यय की है। इस प्रकार जिला योजना में अवमुक्त 11805.12 लाख रुपये में से 11213.33 लाख रुपये का व्यय हुआ है। इसका प्रतिशत कुल 94.99 दर्शाया गया है।
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इन विभागों ने नहीं मिला धेला
उद्यान विभाग, मत्स्य विकास, पंचायती राज, सामुदायिक विकास, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यटन, अनुसूचित जन जाति कल्याण, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, पिछड़ी जाति कल्याण, नगरीय पेयजल, पूल्ड आवास, ग्रामीण पेयजल, आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा, होम्योपेथिक चिकित्सा, परिवार कल्याण, एलौपैथी, खेलकूद, प्राविधिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, शिल्पकार प्रशिक्षण, विकलांग कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पुष्टाहार को एक रुपये भी अवमुक्त नहीं हुआ है।

शासन को किया जा रहा पत्राचार
जिन विभागों को स्वीकृति के बाद धनराशि प्राप्त नहीं हुई है, वे विभाग अपने स्तर से शासन को पत्राचार कर रहे हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष लगभग आधी धनराशि अवमुक्त हुई है।
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बृजकिशोर वर्मा
जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी

कैसे दूर होगी पेयजल की समस्या
नगरीय पेयजल के लिए 90.26 लाख और ग्रामीण पेयजल के लिए 201.15 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, इसके मुकाबले दोनों ही विभागों को फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई है। पर्यटन के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। पर्यटन के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं, इसके सापेक्ष इस मद में एक भी रुपये की धनराशि अवमुक्त नहीं की गई है।
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