तबादला रुकवाने में काम नहीं आएगी सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। वन विभाग में लंबे समय से एक ही स्थल पर डटे दरोगा अब तबादला रुकवाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। कोई सत्तारूढ़ दल के नेताओं के पास पहुंच रहा है तो कोई विभागीय उच्चस्थ अधिकारियों से संपर्क साध रहा है। उधर, डीएफओ का कहना है कि तबादले में किसी प्रकार की सिफारिश काम नहीं आएगी। यदि जरूरत पड़ी तो कार्रवाई करते हुए एकतरफा रिलीव कर दिया जाएगा।
शासन की स्थानांतरण नीति के अनुसार जिले के दो डिप्टी रेंजर सहित कई वन दरोगाओं को गैर जनपद तबादला किया गया है। इनमें कई वन दरोगा ऐसे हैं, जिन्होंने एक ही रेंज में पूरी नौकरी कर ली है तो कइयों को दस से लेकर बीस साल का समय हो गया है। जब ऐसे दरोगाओं को स्थानांतरण की सूचना मिली तो वे बेचैन हो गए। उन्होंने कार्यमुक्त होने से बचने के लिए नाना तरीके के हथकंडे अपनाने आरंभ कर दिए हैं। कई दरोगा स्थानांतरण पत्र लेने से कन्नी काट रहे हैं तो कुछ को बीमारी याद आने लगी है। कइयों ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं व उच्चस्थ अफसरों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। इस मामले में डीएफओ वीके जैन ने सख्य रुख अपना लिया है। उनका कहना है कि स्थानांतरित कर्मचारी को कार्यमुक्त करने में यदि क्षेत्रीय रेंजर बचाने का प्रयास करेंगे तो उनके ऊपर भी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी कर्मचारी को इसमें रियायत नहीं मिलने वाली है। एक दो दिन में वन संरक्षक बुंदेलखंड वृत्त को कार्यमुक्त करने की चल रही प्रक्रिया से लिखित में अवगत कराया जाएगा।
इनके हुए तबादले
वन दरोगा श्रीराम निरंजन, नरेश विदुआ, प्रागीलाल, श्रीपत, कमलापत त्रिपाठी व वरिष्ठ सहायक कमलेश श्रीवास्तव को उरई एवं मुवीनउद्दीन को झांसी भेजा गया है। वहीं, उरई से डिप्टी रेंजर अंगद सिंह, बृजराज सिंह, फारेस्टर रामविलास यादव, माखन, वरिष्ठ सहायक नाजेश सेन व्को ललितपुर स्थानांतरित किया गया है।
15 जुलाई के बाद अफसरों की बारमी
पंद्रह जुलाई के बाद वन अफसरों के तबादले की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वर्तमान में चल रहे पौधरोपण कार्यक्रम को देखते हुए वन अफसरों को छेड़ा नहीं जा रहा है। लेकिन, पौधरोपण पूरा होते ही स्थानांतरण की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी।