ललितपुर। जिले में सूखे के हालात बहुत भयावह हैं। हालातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार करीब सत्तर प्रतिशत खेत बिना बुआई के पड़े हैं। ऐसे में आने वाले समय में किसानों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
बुंदेलखंड क्षेत्र में रबी की फसल ही किसान की मुख्य फसल है। लेकिन, इस बार किसान बुरी तरह से टूटा हुआ है। पहले अतिवृष्टि और ओलावृष्टि के कारण फसल चौपट हो गई थी, फिर पानी नहीं बरसने के कारण किसान बरबाद हो गया। स्थिति यह रही कि रबी के सीजन में भी किसानों के खेत खाली पड़े हैं। वर्ष 2015- 16 में कृषि विभाग ने रबी की फसल आच्छादन के लिए लक्ष्य तय किया था।
इसके मुताबिक गेहूं की फसल की बुआई के लिए 1,74,343 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन सिर्फ 34,840 हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी। जौ के लिए 9,194 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुआई का लक्ष्य तय था, लेकिन सिर्फ 2,850 हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी। इस तरह खाद्यान्न की बुआई के लिए 1,83,538 हेक्टेयर क्षेत्रफल तय किया गया था, लेकिन सिर्फ 37,680 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही बुआई हो सकी। कमोबेश यही स्थिति दलहनी फसलों की भी रही। जिले में चना बुआई का लक्ष्य 21,611 हेक्टयेर क्षेत्रफल में तय किया गया था, लेकिन इसके सापेक्ष सिर्फ 9,865 हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी। मटर की भी यही स्थिति रही। लक्ष्य 82,400 हेक्टेयर के सापेक्ष 34,620 हेक्टेयर में ही मटर की बुआई हो कसी। मसूर की बुआई का क्षेत्रफल 30,207 हेक्टेयर था, इसमें से सिर्फ 9,910 हेक्टेयर में बुआई हो सकी।
तिलहनी फसलों में राई/सरसों की बुआई का लक्ष्य 5,418 हेक्टेयर था, इसके सापेक्ष 1,040 हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी। तोरिया की बुआई का लक्ष्य 1,107 हेक्टेयर क्षेत्रफल था, लेकिन इसमें से सिर्फ 190 हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी। कुल मिलाकर जिले में 3,24,281 हेक्टेयर में रबी की बुआई का लक्ष्य तय था, लेकिन इसमें से सिर्फ 93,305 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही बुआई हो सकी।
जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, उन्हीं किसानों ने इस बार बुआई की है। सूखा के कारण हालात बहुत खराब हैं। लगभग तीस प्रतिशत जमीन में ही बुआई हो सकी है।
- बृजेश कुमार
जिला कृषि अधिकारी