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जीएसटी रिटर्न भरने में सितंबर तक की लेट फीस माफ

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जीएसटी रिटर्न भरने में सितंबर तक की लेट फीस माफ
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जीएसटी काउंसिल के निर्णय से व्यापारियों को मिलेगी राहत
जिले में साढ़े पांच सौ व्यापारियों को मिलेगा लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जीएसटी रिटर्न अब बिना लेट फीस भुगतान के भी अपलोड किए जा सकेंगे। जीएसटी आर-1, जीएसटी आर-2 और जीएसटी आर-3 के लिए सितंबर माह तक का रिटर्न भरने में लेट हो चुके व्यापारियों के लिए जीएसटी काउंसिल ने यह व्यवस्था दी है। ऐसे व्यापारियों के लिए काउंसिल द्वारा रिटर्न दाखिल करने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया गया है।
जनपद में वाणिज्यकर विभाग के खंड एक के अंतर्गत जीएसटी में 1496 व्यापारी माइग्रेट हुए हैं, जबकि 640 नए व्यापारियों ने जीएसटी में पंजीकरण कराया है, इस प्रकार खंड एक के अंतर्गत करीब 2,136 व्यापारी पंजीकृत हैं। वहीं खंड दो के अंतर्गत जीएसटी में 1122 व्यापारी माइग्रेट हुए हैं, जबकि 441 नए व्यापारियों ने जीएसटी में पंजीकरण कराया है। इस प्रकार खंड दो में कुल 1536 व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत हैं और खंड एक एवं खंड दो के अंतर्गत पूरे जिले में जीएसटी में कुल 3699 व्यापारी पंजीकृत दर्शाए गए हैं। इनमें खंड एक के अंतर्गत कुल 315 पंजीकृत व्यापारियों व खंड दो के अंतर्गत करीब 237 पंजीकृत व्यापारियों ने रिटर्न फाइल नहीं किया है, जिसके चलते उन पर लेट फीस भरनी थी और विभाग द्वारा उन्हें नोटिस देने की तैयारी की जा रही थी। वाणिज्यकर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर हरीकेश सिंह ने बताया कि जीएसटी काउंसिल द्वारा जुलाई 2017 से सितंबर 2018 तक की अवधि के रिटर्न भरने पर लेट फीस माफ कर दी गई है। हालांकि इसके सितंबर माह के बाद की अवधि का रिटर्न दाखिल करने में लेट होने वाले व्यापारियों को लेट फीस भी भरनी होगी। काउंसिल के इस निर्णय से करदाता, जो समय पर अपना जीएसटी रिटर्न भर चुका है या अपलोड करते हैं, उनके लिए मायूसी जरूर होगी, क्योंकि वह ईमानदारी से रिटर्न भरने के साथ ही लेट फीस भी भर चुके हैं, लेकिन काउंसिल द्वारा इनके संबंध में कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। जीएसटी रिटर्न का नया सिस्टम एक अप्रैल से 30 जून तक प्रायोगिक तौर पर लागू होगा और एक जुलाई से अनिवार्य हो जाएगा। पूर्व में रिटर्न फाइलिंग में आई परेशानियों से सबक लेते हुए नए रिटर्न सिस्टम को अप्रैल से जून तक वैकल्पिक रूप से रखा है।
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ई-वे बिल पर टैक्स चोरी रोकने को हो सकती है ओटीएम सेवा शुरू
कर चोरी पर लगाम लगाने के लिए ई-वे बिल व्यवस्था कारगर साबित हो रही है। टैक्स चोरी करने के लिए कई तरह के हथकंडे आजमाए जा रहे हैं। इससे सरकार कोे नुकसान हो रहा है। गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार ई-वे बिल में ओटीपी जनरेट सिस्टम लाने की प्लानिंग कर रही है। टैक्स में गड़बड़ी करने वाले माल के ऑर्डर के साथ ई-वे बिल जनरेट तो करते हैं, लेकिन उसे कुछ ही घंटों में फिर कैंसिल ंकर देते हैं। इन ऑपरेट और कैंसिल करने के फेर में सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ई-वे बिल को और पुख्ता बनाने के लिए अब ओटीपी यानी वन टाइम पासवर्ड सिस्टम शुरू करने की योजना है। इस प्रकार के सिस्टम से यह आसानी से पता चल सकेगा कि जिस माल की डिलीवरी की जा रही है, उस पर टैक्स चोरी तो नहीं हो रही। माल डिलीवरी के लिए कोई भी कारोबारी जैसे ही ई-वे बिल तैयार करेगा, उसी के साथ एक ओटीपी नंबर भी जारी होगा। यह नंबर माल डिलीवर होने वाले व्यापारी के यहां जाएगा। माल डिलीवर होने के बाद उसे यह नंबर भेजने वाले को देना होगा। हालांकि, विभागीय अधिकारियों के अनुसार हाल ही में बहुत सारे बदलाव किए गए हैं, लेकिन इसके बारे में उन्हें कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
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