विद्यार्थियों ने दिया चित्रों से दिया गिद्ध संरक्षण का संदेश
डाइक्लोफिक रसायन बन रहा गिद्धों की मौत का कारण
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध संरक्षण दिवस के मौके पर विद्यार्थियों ने चित्रों को बनाकर गिद्ध संरक्षण का संदेश दिया और जानवरों में प्रयोग होने वाले डाइक्लोफिक रसायन के लिए गिद्धों की विलुप्तता का कारण बताया।
नेहरुमहाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध संरक्षण दिवस शनिवार को मानव आर्गेनाइजेशन और भारतीय जैव विविधता संस्थान के संयुक्त प्रयास से मनाया गया। जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी कूची से रंगीन पोस्टर बनाकर गिद्ध संरक्षण का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने गिद्ध पक्षी को जानने की जिज्ञासा थी, जिसे उन्होंने विशेषज्ञों के माध्यम से जाना। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने यहां गिद्धों के संरक्षण के लिए बनाए चित्रों का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों और संस्था की ऐसे आयोजन के लिए प्रशंसा की और गिद्ध को कुदरती सफाई कर्मी बताया। प्राचार्य डा.अवधेश अग्रवाल ने कहा कि महाविद्यालय के विद्यार्थी सदैव इस तरह के आयोजनों में भागीदारी के तत्पर हैं। गिद्ध का कम होना पर्यावरण के लिए अत्यंत चिंतनीय है। हम सबको मिलकर इसे बचाने के लिए प्रयास तेज करने होंगे। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने प्रत्येक बनाए गए चित्र का बारीकी से अवलोकन किया और विद्यार्थियों को प्रोत्साहन करते हुए कहा कि गिद्ध आदिकाल से पर्यावरण का सबसे बड़ा हितैषी रहा है। हम सब रामायण में जटायु के रुप में गिद्ध के वर्णन को पढ़ते हैं, जिससे हमें मालूम होता है कि गिद्ध हमेशा से प्रकृति के लिए प्रेरणादायक व लाभकारी हैं। कार्यक्रम संयोजन डा.राजीव निरंजन ने बताया कि सन 1090 में हमारे देश में गिद्धों की संख्या करीब चार करोड़ के आसपास थी, लेकिन वर्तमान में यह घटकर करीब दस हजार ही रह गई है। भारत के आंध्रप्रदेश राज्य में गिद्ध पूर्णत: विलुप्त हो चुके हैं। आज हम सबको मिलकर इन्हें बचाने के लिए वृहद प्रयास करने होंगे। मानव आर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष अधिवक्ता पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जानवरों में प्रयोग होने वाला डाइक्लोफिक रसायन से इनके शरीर में होने वाले जहर उत्पन्न हो जाता है। जिससे गिद्धों के गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं और परिणाम स्वरुप गिद्धों की मौत हो जाती है। गिद्ध प्रकृति की एक सुंदर रचना है। जिसे आज सहेजने की आवश्यकता है, यदि इन्हें समय रहते नहीं सहेजा गया तो भविष्य में जंगलों में मरे हुए जानवरों से खतरनाक संक्रामक बीमारी पैदा होने की संभावना है। गिद्धों का हिंदू, पारसी, यूनानी, तिब्बती और अफ्रीकी संस्कृतियों में धार्मिक महत्व है। इस आयोजन में स्काउट एंड गाइड्स के बच्चों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और गिद्धों को बचवाने की शपथ ली। इस आयोजन के दौरान जिलाविद्यालय निरीक्षक रामशंकर, हीरु गुप्ता, राजेश पाठक, स्वतंत्र व्यास, आशीष साहू, शैलेंद्र कुमार, ऋषि हीरानंदानी, संजय सेन, देवेंद्र यादव, दीक्षा राज सक्सेना, भरत वैद्य, अभय सचान, आकृति सिंह, देवेश पुरोहित, स्वाती, बबली यादव, नेहा, उमा, दीपा, पूजा उपस्थित रहे।