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जान लेवा साबित हो सकता बच्चो का ड्राइविंग शौक

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जानलेवा साबित हो सकता बच्चो का ड्राइविंग शौक
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परिवहन की लापरबाही से नहीं थम रहे रोज हादसे
अमर उजाला ब्यूरो
पाली (ललितपुर)।
बगैर ड्राइविंग लाइसेंस या नाबालिगों का सड़कों पर गाड़ी चलाना जुर्म है। किशोर न सिर्फ यह जुर्म कर रहे हैं, बल्कि उन्हें जान भी गंवानी पड़ रही है। इनसे बड़े अपराधी अभिभावक हैं, जो बच्चों के शौक पूरा करने के लिए उन्हें कच्ची उम्र में ही बाइक सौंपकर छोड़ रहे हैं।

हादसों के लिए अभिभावक ही अपराधी
नाबालिग बच्चों को बाइक थमा देने वाले अभिभावकों पर कार्रवाई होगी। क्योंकि पहली जिम्मेदारी उनकी ही बनती है। स्कूलों में बच्चे बाइक लेकर जाते हैं। स्कूल के जिम्मेदारों को भी बुलाकर हिदायत दी जाएगी
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यदेवेंद्र पाल सिंह, उपजिलाधिकारी पाली

अभिभावकों की जिम्मेदारी तय हो
मां बाप बच्चों को दोपहिया वाहन खरीद कर दे देते हैं, जबकि 18 साल की उम्र से पहले बाइक नहीं चला सकते हैं। बच्चे बाइक चलाते हैं तो अभिभावक की जिम्मेदारी है। ऐसे हादसों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
रामकुमार चौरसिया, अध्यक्ष नगर पंचायत पाली

पकड़े जाने पर अभिभावक पर होगा केस
अगर नाबालिग के हाथ में बाइक सौंपेंगे तो ऐसी घटनाएं जरूर होंगी। इसके लिए बच्चों से ज्यादा उनके अभिभावक जिम्मेदार हैं, हादसों की परवाह किए बगैर महंगी से महंगी गाड़ियां खरीद कर बच्चों को थमा दे रहे हैं।
आनंद सिंह भदौरिया, थानाध्यक्ष पाली

हो सकती कार्रवाई
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 4 के तहत 18 से कम आयु वर्ग का किशोर सार्वजनिक स्थान पर वाहन नहीं चला सकता। हालांकि 16 वर्ष से कम आयु वाला किशोर 50 सीसी इंजन क्षमता का वाहन चला सकता है। इसका उल्लंघन करने पर 2000 रुपये जुर्माना या तीन माह की सजा का प्रावधान है। कुछ विशेष परिस्थिति में दोनों सजा लागू हो सकती है वहीं दुर्घटना की स्थिति में भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ए के तहत कार्यवाही की जाती है।
देवआनंद, सीओ पाली

चालक नाबालिग है तो वाहन स्वामी को देनी होगी क्लेम की राशि
विधि विशेषज्ञ अधिवक्ता बताते है कि अगर वाहन की टक्कर से किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो मृतक के घर वाले मोटर एक्सीडेट ट्रिव्यूनल में दावा कर सकते हैं। प्रत्येक जनपद में यह ट्रिव्यूनल गठित है। मृतक के परिवार की स्थिति को देखते हुए क्लेम की राशि उनके घरवाजों को दी जाती है। अगर गाड़ी पंजीकृत है और वाहन चलाने वाला शख्स का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। तो क्लेम की राशि गाड़ी के मालिक को अदा करनी पड़ती है। यह राशि 10 लाख रुपये तक भी हो सकती है। वहीं, बीमा विशेषज्ञ बताते है कि नाबालिग के ड्राइविंग करने की स्थिति में इश्योरेंस का कोई क्लेम नहीं बनता है। इस मसले पर सारी देनदारी वाहन के मालिक की हो जाती है।
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मनीष तिवारी, अधिवक्ता पाली

अभिभावक दोषी
18 वर्ष से नीचे की उम्र के बच्चों को बाइक और कार चलाने की अनुमति देने वाले मां और बाप दोषी है। स्कूल में वाहन लेकर आने वाले छात्रों को समझाने के लिए कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आगे भी इस तरह के आयोजन होंगे ट्रैफिक पुलिस के साथ वह अभिभावकों की भी मीटिग कर उन्हें भी जागरूक किया जाएगा। यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
मुकेश कुमार परिहार, प्रधानाचार्य महावीर इंटर कॉलेज पाली
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