39 लाख से होगा गल्ला मंडी का कायाकल्प
ललितपुर।
गल्ला मंडी में व्याप्त अव्यवस्थाओं के मामले प्रकाश में आने के बाद मंडी समिति प्रशासन ने व्यवस्थाओं को सुधारने की गति तेज कर दी है और रबी की फसल आने से पूर्व किसानों के लिए यहां इंतजामों के सुधार के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंडी समिति द्वारा व्यवस्थाओं के सुधार के लिए 39 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
गल्ला मंडी परिसर में मंडी समिति द्वारा शासन की मंशानुसार जनपद व आसपास से आने वाले किसानों की सुविधाओं के लिए विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। लेकिन मंडी में कई महीनों से यहां स्थापित शौचालय, हैंडपंप के साथ ही नीलामी चबूतरों की स्थिति भी बिगड़ती जा रही है। यहां तक शौचालय की सीटों के साथ अंदर का फर्श तक खराब हो गया था। इसके चलते यहां शौचालय हमेशा बंद बना रहता है और इसके लिए परेशान होना पड़ता है। इसके साथ ही यहां करीब दस हैंडपंप भी खराब चल रहे हैं, जिसके चलते हैंडपंप लगे होने के बाद भी शोपीस बने हुए हैं। इसके साथ ही किसानों की फसल के रखने के लिए बनाए गए नीलामी चबूतरों पर व्यापारियों द्वारा ही यहां रोजाना क्विंटलों जिंस के बोरे रखने की वजह से यह चबूतरे भी खराब होते जा रहे हैं। जबकि फसल आने पर अधिकांश नीलामी चबूतरों पर व्यापारी ही कब्जा किए रहते हैं, जिससे किसानों को इन नीलामी चबूतरों के भरे होने पर रोड पर ही लाए गए अनाज को रखना होता है, जिससे कई बार बारिश के दिनों में तो किसानों की फसलें तक खराब हो जाती हैं। गल्ला मंडी व्याप्त इन तमाम असुविधाओं को देखते हुए अमर उजाला ने किसान हित में अव्यवस्थाओं के मुद्दे को प्रमुखता के साथ उठाया था। जिसका संज्ञान आला अधिकारियों व मंडी प्रशासन द्वारा भी लिया गया है, जिसके चलते अब मंडी प्रशासन द्वारा मंडी में व्याप्त अव्यवस्थाओं को सुधारने की गति तेज कर दी गई है। मंडी प्रशासन द्वारा टूटे व खराब शौचालयों की मरम्मतीकरण, हैंडपंप सुधारने और नीलामी चबूतरों की मरम्मत के लिए 39 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार कर उक्त कार्यों की ई-टैंडरिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें शौचालय की मरम्मत के कार्य के लिए सात लाख रुपये, हैंडपंप मरम्मत के लिए 4.24 लाख रुपये और नीलामी चबूतरों की मरम्मत के लिए 27.76 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। गल्ला मंडी समिति के अवर अभियंता अनिल कुमार ने बताया कि यह सभी कार्य फसल आने से पूर्व 28 फरवरी तक पूरे किए जाने हैं, ताकि किसानों को फसल आने के दौरान अव्यवस्थाओं के अभाव में परेशान न होना पड़े। हालांकि अब देखना होगा कि मंडी प्रशासन द्वारा उक्त कार्य होने के बाद व्यवस्थाओं में कितना सुधार होता है।