संकरे पुलों से जनता परेशान, हर रोज लगता है घंटो जाम
ललितपुर। शहर के जर्जर व सकरे पुलों की तरफ सरकार गंभीर नहीं है। नगर को जोड़ने वाले मुख्य शहजाद नदी और बयाना नाला के पुलों पर संकरे होने के कारण घंटों जाम लगा रहता है, तो घुसयाना के टूटे पुल से करीब दो वर्ष से अधिक समय से आवागमन ठप है। पुलों पर रेलिंग और मरम्मत के अभाव में हमेशा हादसों का खतरा बना रहता है।
ललितपुर नगर में नदी और नालों पर अंग्रेजी शासनकाल के दौरान बनाए गए पुलों पर आज भी शहर की आबादी गुजरती है। मुख्य सड़क पर शहजाद नदी और बयाना नालों के दो मुख्य पुल बने हैं, हर राज हजारों वाहनों का आवागमन होता है। शहर में शहजाद नदी और बयाना नाला पर आधा मुख्य सड़क के अलावा आधा दर्जन पुल और भी बने हैं। इसमें मुख्य सड़क के अलावा किसी भी पुल पर रेलिंग की व्यवस्था नहीं है। मुहल्ला घुसयाना में बयाना नाले पर बनाया गया पुल कुछ ही साल चल पाया था करीब तीन वर्ष से नाले में मध्य से एक ओर तक आधा पुल पूरी तक से टूट चुका है। पूर्व बयाना नाले पर मुख्य सड़क पर बने पुल पर जब जाम लग जाता था, तो मुहल्ला घुसयाना का यह पुल छोटे वाहनों के लिए एक बड़ी राहत देता था और आपातकाल में लोगों का सहारा बनता था, लेकिन यह पुल टूटने से अब मुहल्ले वासियों के साथ अन्य शहर वासियों को भी परेशान होना पड़ रहा है। मुख्य सड़क पर बना शहजाद नदी का पुल संकरा होने के कारण आए दिन यहां जाम की स्थिति बनी रहती है। दो बड़े वाहनों का इस पुल से एक साथ निकलना संभव नहीं है।
हालांकि इस पुल पर जाम की स्थिति में ललितेश्वरी माता मंदिर के पास बस्ती के बीच से नदी पर बनाया गया रेलिंग बिहीन पुल कुछ हद तक राहत जरूर दिलाता है, लेकिन इसकी हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। इस पर रेलिंग की नहीं होने से यहां वाहनों के आवागमन के दौरान वाहन चालकों को परेशानी होती है। उचित प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से रात्रि में दुर्घटना का भय भी बना रहता है। बारिश के दिनों में शहजाद नदी के दोनों पुल बांध के गेट खुलने पर डूब जाते हैं, जबकि कई बार बाढ़ आने से बयाना नाला का पुल भी डूब जाता है। इससे कई बार शहर का संपर्क टूट जाता है और लोगों को समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसी प्रकार पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास शहजाद नदी पर बनाया पुल काफी जर्जर हो चुका है। इसके साथ ही इस पुल पर न तो रेलिंग ही आज तक लगाई जा सकी है और न ही इस पुल की मरम्मत हो सकी है, इसके चलते इस पुल पर भी हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। शहर में नदी व नालों पर बने इन पुलों के चौड़ीकरण के साथ इनकी ऊंचाई बढ़ाने की मांग विभिन्न संगठनों द्वारा वर्षों से लगातार की जाती रही है, लेकिन सरकार इन पुलों की ओर अधिक गंभीर दिखाई नहीं दे रही है।
उचित प्रकाश और रेडियम पट्टी भी नहीं
शहर में बने पुलों और पुलिया पर संबंधित विभागों द्वारा उचित प्रकाश और रेडियम की व्यवस्था भी नहीं कराई गई है, इससे आए दिन नदी, नालों के पुलों पर हादसे घटित होते रहते हैं। कई बार तो रात में विद्युत प्रकाश नहीं होने के चलते कई वाहनों के नदी, नालों में भी गिरने की आशंका बनी रहती है। जबकि कई बार इस प्रकार के हादसे भी यहां हो चुके हैं।