मुसाफिरों के ठहरने की व्यवस्था नहीं संभाल सकी पालिका
ललितपुर।
पूर्व पालिकाध्यक्ष डा. शादीलाल दुबे की मुसाफिरों को रियायती दरों पर ठहरने की सुविधा मुहैया कराने की व्यवस्था को पालिका प्रशासन आगे संभाल नहीं सकी। नतीजा यह हुआ कि जिस भवन में इसे चालू किया गया था, उसमें अब ताले जड़ चुके हैं। इससे पालिका की आय में तो कटौती हुई, साथ ही मुसाफिरों की भी दिक्कतें बढ़ गई।
नगर पालिका परिषद के गठन से लेकर अब तक कई अध्यक्ष निर्वाचित हो चुके हैं। लेकिन, डा. शादीलाल दुबे एक ऐसे अध्यक्ष बने, जिनके काम आज भी याद किए जाते हैं। वर्षों पहले शहर में एकाध ही होटल थे, जिनमें ठहरना आम आदमी के बस के बाहर था। इसके मद्देनजर डा. शादीलाल दुबे ने पुराने बस स्टैंड के पास स्थित भवन में मुसाफिरों को ठहरने की सुविधा प्रदान की। इस भवन को नगर भवन का नाम दिया गया। उस दौरान नगर भवन के समीप में बस स्टैंड होने से यह व्यवस्था काफी लोकप्रिय हुई। स्थिति यह बनी कि शहर में आने वाले मुसाफिर ठहरने के मामले में बेफ्रिक नजर आने लगे। मुसाफिर बस से उतरते और इस भवन में ठहरने के लिए पहुंच जाते। भवन में अलमारी लेने पर 50 पैसे व कमरा बुक कराने के एक-दो रुपये वसूले जाते थे। जब सदनशाह पर उर्स आयोजित होता था तो गांव देहात के साथ अन्य शहरों से आने वाले लोग भी उर्स में आते थे तो ये लोग इस सुविधा का भरपूर लाभ उठाते थे। कई बार तो लोगों को जगह नहीं मिल पाती थी। वहीं, मनहारी का सामान बेचने वाले भी इस व्यवस्था को काफी पसंद करते थे। एक समय आया जब बस स्टैंड यहां से स्थानांतरित होकर प्रदर्शनी ग्राउंड में पहुंच गया। इसके बाद रियायती दरों पर ठहरने की सुविधा डगमगाने लगी। पालिकाध्यक्षों ने भी इससे ध्यान हटा लिया। आखिरकार नगर भवन में मुसाफिरों के ठहरने की सुविधा पर विराम लग गया। काफी समय तक यह भवन खाली बना रहा। जब नीलम सिंह वर्मा चेयरमैन बने तो उन्होंने नगर पालिका का नया भवन बनाने के लिए कार्यालय नगर भवन में शिफ्ट कर दिया। इस दौरान नगर भवन के दिन बहुर गए। लेकिन जब पालिका कार्यालय एक बार यहां हटकर नई बिल्डिंग में पहुंचा तो किसी ने नगर भवन की ओर पलटकर नहीं देखा। वर्तमान में इस भवन का इस्तेमाल स्टोर रूम के रूप में हो रहा है। स्थानीय नागरिक आज भी डॉ. शादीलाल दुबे की मुसाफिरों को ठहराने की व्यवस्था को याद कर लेते थे। बता दें कि बीते माह नगर पालिका चुनाव के दौरान अध्यक्ष पद के लिए सपा की उम्मीदवार बनी संध्या सुड़ेले ने नगर भवन को मुसाफिरों के खोलने की बात कही थी लेकिन उनके चुनाव हारते ही उम्मीद किरण समाप्त हो गई। हालांकि, भाजपा उम्मीदवार रजनी साहू के निर्वाचित होने से अन्यत्र स्थान पर पलंग की सुविधा उपलब्ध होने की आश अभी जिंदा बनी हुई है।
डा. दुबे से नहीं लेते कोई प्रेरणा
जिस भवन में पालिका का कार्यालय संचालित हो रहा है उसका नाम डा. शादीलाल दुबे काम्प्लेक्स रखा गया है। यही नहीं, पालिका के सभागार में भी डा. दुबे की इकलौती फोटो लगी हुई है। इसके बाद भी निर्वाचित अध्यक्ष उनके पद चिन्हों पर चलने के लिए तैयार नहीं है।
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फोटो 13
कैप्सन- ललित कौशिक
नगर भवन को दुबारा चालू किया जाए
बुंदेलखंड में पहले से गरीबी है और जिले का और भी बुरा हाल है। आज भी तमाम लोग होटलों का किराया देने में समर्थ नहीं हैं। यदि इसे दुबारा चालू कर दिया जाए तो निर्धनों को ठहरने की आसान सुविधा मिल जाएगी।
ललित कौशिक
स्थानीय नागरिक
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फोटो 12
कैप्सन- इमरत सिंह लोधी
पालिका की आय का बन सकता जरिया
पूर्व पालिकाध्यक्ष डा. शादीलाल दुबे ने नगर भवन में ठहरने की सुविधा दी थी जो काफी लोकप्रिय रही। उस जमाने में पचास पैसे अलमारी व एक-दो रुपये में कमरा मिल जाता था। इस व्यवस्था से आम आदमी लाभान्वित होता था, साथ ही पालिका को भी आमदनी होती थी। वर्तमान में खाली भवन में कबाड़ व पुरानी मशीनरी रखी है।
इमरत सिंह लोधी
विक्रेता
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सर्दियों में चालू होता रैन बसेरा
नगर पालिका परिषद अब सर्दियों में ही ठहरने की सुविधा प्रदान करती है। कोतवाली के सामने पेंशनर हॉल में रजाई गद्दे डाल दिए जाते थे। लेकिन सभी मौसम में इस तरह की कहीं व्यवस्था नहीं है। खासकर बारिश के समय ग्रामीणों को इसकी कमी खासी खलती है।
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पलंग की सुविधा मुहैया कराने की योजना
चुनाव के दौरान गरीब, असहायों को ठहरने के लिए पलंग की सुविधा मुहैया कराने का वायदा किया था। जिसे जल्द ही शुरू कराने की योजना है। इसमें रखरखाव के लिए मामूली सा शुल्क रखा जाएगा। जिससे यह व्यवस्था आगे भी चलती रहे।
रजनी साहू
अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद ललितपुर।