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टंचिग ग्राउंड पर कूड़े का बना पहाड़, अब कचरा आया सड़क किनारे

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टंचिग ग्राउंड पर कूड़े का बना पहाड़
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अब कचरा आया सड़क किनारे, स्थानीय लोगों में देखा जा रहा है असंतोष
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। वार्ड नंबर छह रामनगर में टंचिग ग्राउंड पर कूड़ा डालने की कहीं जगह नहीं बची है। पालिका ने जिस स्थान को अधिकृत कर रखा है, वह कूड़े के पहाड़ के रूप में तब्दील हो गया है। अब पालिका के सफाई कर्मियों ने शहर से एकत्रित हो रहे कचरे सड़क किनारे के खाली स्थान पर डालना शुरू कर दिया है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष देखा जा रहा है।
वर्ष 1941 में नगर पालिका परिषद के पहले अध्यक्ष शिवदयाल तिवारी बने थे। उस दौरान कूड़ा डालने के लिए स्थान तय नहीं था। राजघाट रोड स्थित हरदीला की खदानों में यूं ही कूड़ा फेक दिया जाता था। लेकिन, जब डा. शादीलाल दुबे ने पालिका की कमान संभाली तो उन्होंने कूड़े के निपटान के लिए पृथक से टंचिग ग्राउंड बनाने पर जोर दिया। आखिरकार पालिका मुहल्ला रामनगर में इसके लिए भूमि तलाशने में कामयाब रही। यहां एक एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में वर्षो से शहर का कूड़ा डाला जा रहा है। जिससे टंचिग ग्राउंड पर कूड़ा के छोटे-बड़े पहाड़ बन गए हैं। जहां नजर पहुंचती है वहां कूड़ा के ढेर दिखाई देते हैं। वहीं अब टंचिग ग्राउंड से सटकर मकान भी बन गए हैं। गर्मी व सर्दियों के सीजन में कूड़ा से लदे ट्रैक्टर ट्राली व अन्य लोडिंग वाहन ऊंचाई वाले क्षेत्र में पहुंच पाते हैं लेकिन बारिश के मौसम में यहां फिसलन हो जाती है। जिससे कूड़ा सड़क किनारे खाली स्थान पर डालना प्रारंभ कर दिया जाता है। इस बार भी ऐसा ही हो गया है। जो टंचिग ग्राउंड के आसपास लोग रह रहे हैं, उनके लिए परेशानी बढ़ गई है। बारिश के सीजन में कूड़ा से तीखी दुर्गंध भी उठने लगती है। इस स्थिति में टंचिग ग्राउंड के समीप से निकलना मुश्किल हो जाता है। इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
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अभियान का ठेगा दिखा रहा टंचिग ग्राउंड
एक ओर स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए लोगों को जागरुक किया जा रहा है। वहीं, पूरे शहर का कचरा बस्ती के बीच में फेका जा रहा है जो कहां तक उचित है। इस संबंध में डीएम सहित आईजीआरएस पर कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
शिवनारायण वर्मा

संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ा
मुहल्ले में टंचिग ग्राउंड संक्रामक बीमारियों के फैलने का न्योता दे रहा है। जब इस स्थल से दुर्गंध उठती है तो आसपास ठहरना मुश्किल हो जाता है। जिन लोगों ने यहां घर बनाए हैं वह किस स्थिति में रह रहे हैं, उसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इसके बाद भी विभागीय अफसर टंचिग ग्राउंड को हटाने के लिए कोई पहल नहीं कर रहे हैं।
नंदलाल

मुहल्ले में बढ़ रहे श्वास के रोगी
टंचिग ग्राउंड बस्ती के बीच में आ जाने से मुहल्ले में श्वास रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो गई है। जब तेज हवा का झौका चलता है तो कूड़े की तीक्ष्ण गंध दूर-दूर तक फैल जाती है। कई बार तो यहां चले जाने का मन करता है लेकिन घर छोड़कर कहां जाए, यह समझ नहीं आता है? अधिकारियों को स्थानीय लोगों की पीड़ा का बिलकुल भी अंदाजा नहीं है।
हरीकिशन

हो गया सीमा विस्तार, फिर भी कहते जमीन की कमी
जब नगर पालिका परिषद की सीमा का विस्तार नहीं हुआ था तब वास्तविक जमीन की कमी थी। अब जब सीमा का विस्तार हो चुका है तो जमीन की कमी होने का राग अलापना स्थानीय लोगों को धोखा देने जैसा है। सच तो यह है कि अधिकारी ही यहां से टंचिग ग्राउंड को हटाने की पहल नहीं कर रहे हैं।
रमेश बाबा

जमीन की अनुपलब्धता
वर्षो पहले टंचिग ग्राउंड मुहल्ला रामनगर में बनाया गया था जब आसपास बस्ती भी नहीं थी। वर्तमान में पालिका के पास अन्य कोई जमीन टंचिग ग्राउंड के लिए उपलब्ध नहीं है। जहां तक परेशानी की बात है तो लोगों को इस ग्राउंड के आसपास मकान बनाने ही नहीं चाहिए थे।
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अवनींद्र कुमार
अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद

टंचिग ग्राउंड ने निर्मित भवन में रोकी कक्षाएं
टंचिग ग्राउंड के स्थानांतरित नहीं हो से अकेले मुहल्लेवासी परेशान नहीं हैं बल्कि स्कूली बच्चे भी प्रभावित हैं। यहां वर्षो पहले रामनगर स्कूल के लिए लाखों रुपये की लागत से भवन बनाया गया था, जिसमें आज तक कक्षाएं समीप में टंचिग ग्राउंड होने के चलते चालू नहीं हो सकी। वर्तमान में निर्मित भवन देखरेख के चलते जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच गया है।
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