ऑनलाइन बिलिंग शुरू, नहीं मिले तीन माह से बिल
ललितपुर।
बिजली विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन बिलिंग शुरू करते ही विद्युत बिलों में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। दो माह का नलकूप का बिल फिक्स चार्ज होने के बाद भी सात से आठ हजार रुपये तक आ रहा है। जबकि घरेलू या पावर कनेक्शनों के बिल भी हजारों में आ रहे हैं। ऐसे में जहां उपभोक्ताओं की जेब ढीली हो रही हैै, वहीं गलत बिल होने की वजह से राजस्व वसूली भी प्रभावित हो रही है, मामले में अधिशासी अभियंता ने गलत बिलिंग की शिकायत लखनऊ स्थित कार्यालय में आला अधिकारियों व बिलिंग कंपनी से की है।
जनपद में तीन ग्रामीण विद्युत उपखंडों द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ के अंतर्गत करीब 40 हजार विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति के सापेक्ष विद्युत बिल मुहैया कराए जाते हैं। अभी तक विद्युत कर्मचारियों द्वारा घरों में विद्युत मीटरों से रीडिंग लेकर या फिर आईडीएफ श्रेणी या बिना रीडिंग के बिल का डाटा पहुंचाकर आगरा से हर माह के विद्युत बिल मुहैया कराए जाते थे। ऐसे में विद्युत बिलों में भारी गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी, जिसके चलते उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी पारदर्शिता बरतने के लिए ऑनलाइन विद्युत बिलिंग शुरू की। इसके चलते इसी वर्ष तीन पूर्व पूर्व फरवरी माह में ही आगरा से आने वाले बिलों पर रोक लगा दी गई। इसके बाद इसी माह की नौ जून से देहात क्षेत्र के महरौनी व तालबेहट क्षेत्रों में ऑनलाइन बिलिंग विशेष सॉफ्टवेयर एसबीएम मशीन से शुरू तो कर दी गई। लेकिन मशीनों व ऑपरेटरों की संख्या कम होने के चलते जहां तालबेहट में तीन मशीनों से ही अप्रशिक्षित ऑपरेटरों की मदद से बिल निकाले जा रहे हैं। वहीं, महरौनी में भी ग्रामीण क्षेत्रों के अंतर्गत मड़ावरा, बानपुर, पाली में अब तक ऑनलाइन बिलिंग शुरू ही नहीं हो सकी है, जिसके चलते उपभोक्ताओं को आईडीएफ या एनआर यानी मीटर खराब या बिना रीडिंग के बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसमें भी फिक्स चार्ज के हिसाब से बिल बनने चाहिए, लेकिन विभागीय गड़बड़ी होने के चलते बिलों में फिक्स चार्ज के सापेक्ष काफी अधिक राशि के बिल कंप्यूटर से निकल रहे हैं। ग्राम नैगुंवा, सुनवाहा निवासी लीदल लोधी का नलकूप का दस एचपी का दो माह का बिजली का बिल सात हजार 974 रुपये बनाया गया है, जबकि एक माह का नलकूप का दस एचीप बिल मात्र 1800 रुपये आना चाहिए। इस हिसाब से दो माह का बिल 3600 रुपये ही होना चाहिए, जो चार हजार 374 रुपये अधिक है। हालांकि नलकूप के बिल पहले की तरह ही बनाए जा रहे हैं, इसके बाद भी इनमें गड़बड़ी आ रही हैं। ऐसे एक दो नहीं बल्कि अधिकांश बिल इसी प्रकार से निकल रहे हैं।
वहीं, तालबेहट की बात करें तो 11 हजार 289 उपभोक्ताओं के सापेक्ष मात्र 30 फीसदी उपभोक्ताओं को बिल मिल रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में तो बिलिंग नगण्य है। वहीं उपखंड कार्यालय द्वितीय के अंतर्गत करीब 18 हजार विद्युत उपभोक्ताओं के बिल तीन माह से अब तक उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं। ऐसे में जहां कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को गलत बिल मुहैया कराए जा रहे हैं, वहीं बहुत से क्षेत्रों में बिल उपलब्ध ही नहीं कराए जाने से विभाग की राजस्व वसूली भी प्रभावित हो रही है। गत दिवस तालबेहट में मुख्य अभियंता के भ्रमण कार्यक्रम के दौरान उपभोक्ताओं ने भी इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई और सही बिलिंग कराने के साथ ही बिलिंग ऑपरेटरों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े किए। तालबेहट टाउन क्षेत्र में गलत बिल बनाने की शिकायत की गई और ऑपरेटरों को निर्धारित यूनीफॉर्म तय कर बिलिंग करवाने की बात रखी। जिस पर चीफ अभियंता ने इसे गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समस्या निस्तारण का आश्वासन भी दिया। वहीं उपखंड अधिकारी चतुर्थ, विद्युत तालबेहट ने बताया कि बिलों के संबंध में चीफ अभियंता के सामने बात रखी गई है, बिलों में शिकायत मिल रही हैं। बिलिंग कंपनी के मैनेजर हिंग्वासिया से कंपनी बिलिंग ऑपरेटर के संबंध में शिकायत की गई है।
इनका कहना है-
विद्युत बिलों में कुछ गड़बड़ियां आ रही हैं, जिसकी शिकायत आला अधिकारियों से लिखित रूप से की गई है, बिलों की गड़बड़ियां शीघ्र दूर कराई जाएंगी। -एसके गुप्ता, अधिशासी अभियंता विद्युत।