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Lalitpur News: सिद्धचक्र महामंडल विधान में समर्पित किए 512 अर्घ्य

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ललितपुर। आचार्य निर्भय सागर महाराज ने धर्म का मर्म समझाते हुए भवसागर से मुक्त होने के लिए प्रथम अभिषेक शांतिधारा करने एवं प्रथम आहार दान देने के महत्व पर प्रकाश डाला। पारसनाथ दिगंबर जैन अटा मंदिर में अष्टाह्निका महापर्व पर आचार्य श्री ने कहा कि मंदिर में सिर ढंककर रखना चाहिए, क्योंकि महिला-पुरुष के केशों से विकिरण निकलता है, जो नकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। अतः देव शास्त्र गुरु की शरण में बालों को ढंककर मर्यादित वेश भूषा धारण करें। प्रतिष्ठाचार्य डॉ. अभिषेक जैन और पं. संतोष कुमार जैन के निर्देशन में 2 से 11 जुलाई तक चलने वाले सिद्धचक्र महामंडल विधान में निरंतर धर्म प्रभावना हो रही है। आठवें दिन धर्मावलंबियों ने श्रद्धा भाव से 512 अर्घ्य समर्पित किए। रात्रि में मंगल आरती एवं प्रवचन हुआ। ध्वजारोहण प्रकाशचंद्र, कैलाशचंद्र, धर्मेंद्र जैन परिवार एवं दीप प्रज्जवलन अनीता अशोक जैन ने किया। कार्यक्रम में अध्यक्ष डॉ. अक्षय तडै़या, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत खजुरिया, कोषाध्यक्ष सौरभ जैन, प्रतीक इमलिया, राकेश रिंकू, अमित पुल्ली, अजय गंगचारी, मनोज सिंघई आदि मौजूद रहे।
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